नई दिल्ली: मार्च 2026 टमाटर उत्पादक किसानों के लिए मुश्किल भरा महीना साबित हुआ। मार्च में टमाटर की कीमतों में पूरे महीने देशभर की मंडियों में गिरावट दिखी, जिससे किसानों को अपनी लागत निकालना भी कठिन हो गया। थोक बाजार के आंकड़ों के अनुसार, मार्च के अंतिम सप्ताह में टमाटर की औसत कीमत करीब 1,548 रुपये प्रति कुंतल रही, जो तीसरे सप्ताह के 1,601 रुपये प्रति कुंतल से भी कम है।
पूरे महीने जारी रही गिरावट
मार्च के दौरान कई प्रमुख उत्पादक राज्यों में कीमतों में लगातार गिरावट दर्ज की गई। आंध्र प्रदेश में लगभग 17 प्रतिशत और छत्तीसगढ़ में करीब 30 प्रतिशत तक दाम घटे। इसके अलावा गुजरात, महाराष्ट्र और पंजाब में भी टमाटर के भाव कमजोर बने रहे। कई मंडियों में दाम 700 से 1,200 रुपये प्रति कुंतल के बीच रहे, जबकि कुछ जगहों पर यह 200 से 300 रुपये प्रति कुंतल तक गिर गए, जिससे किसानों को सीधा नुकसान उठाना पड़ा।
चौथे सप्ताह में और बिगड़े हालात
महीने के चौथे सप्ताह में स्थिति और अधिक खराब हो गई। राजधानी दिल्ली समेत कई बड़े बाजारों में टमाटर की कीमतें घटकर लगभग 1,300 से 1,350 रुपये प्रति कुंतल तक पहुंच गईं। छत्तीसगढ़, हरियाणा, राजस्थान और पंजाब में भी गिरावट का दबाव बना रहा, जिससे पूरे देश में बाजार कमजोर बना रहा।
महीने के अंत में भी नहीं मिला राहत
27 मार्च को भी टमाटर के दाम में सुधार नहीं हुआ। इस दिन देशभर में औसत कीमत करीब 1,273 रुपये प्रति कुंतल दर्ज की गई और कुल आवक 4,254 मीट्रिक टन से अधिक रही। राज्यवार आंकड़ों में काफी अंतर देखने को मिला, जहां कुछ मंडियों में अधिकतम भाव 2,000 रुपये प्रति कुंतल से ऊपर रहे, वहीं कई प्रमुख क्षेत्रों में औसत दाम 500 से 800 रुपये प्रति कुंतल के बीच सिमट गए।
लागत से कम दाम, बढ़ा नुकसान
विशेषज्ञों के अनुसार टमाटर उत्पादन की लागत औसतन 600 से 1,000 रुपये प्रति कुंतल के बीच होती है। ऐसे में जब मंडियों में दाम 500 से 800 रुपये तक गिर जाते हैं, तो किसानों को सीधे घाटा उठाना पड़ता है। यही कारण है कि वर्तमान समय में कई किसान उचित मूल्य न मिलने के कारण आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। टमाटर के दामों में आई इस गिरावट ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है और बाजार में स्थिरता लाने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
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