कृषि समाचार

भारत में इथेनॉल उत्पादन दोगुना, डीजल ब्लेंडिंग की तैयारी

Ethanol production in India

नई दिल्ली: ऑल इंडिया डिस्टिलर्स’ एसोसिएशन (AIDA) ने भारत में इथेनॉल उत्पादन को लेकर बड़ा दावा किया है। एसोसिएशन का कहना है कि भारत में इस समय जितना इथेनॉल उत्पादन हो रहा है, उसे अब दोगुना करने की क्षमता उद्योग के पास मौजूद है। इसके साथ ही पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेंडिंग के बाद अब सरप्लस उत्पादन का इस्तेमाल डीजल में आइसोब्यूटेनॉल (Isobutanol) की ब्लेंडिंग के लिए करने की तैयारी की जा रही है। AIDA के अनुसार इससे किसानों को सीधा फायदा मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। हालांकि एसोसिएशन ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस विषय पर अभी तक सरकार या संबंधित मंत्रालय से कोई औपचारिक बातचीत नहीं हुई है।

AIDA ने संकेत दिए हैं कि जल्द ही वह अपने प्रस्ताव के साथ सरकार और मंत्रालय के अधिकारियों से मुलाकात करेगा। वहीं 24 मार्च 2026 को दिल्ली में होने वाले AIDA के कान्क्लेव में इस दिशा में कोई बड़ी घोषणा संभव है। उल्लेखनीय है कि देश में इस समय ई20 योजना लागू है, जिसके तहत पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल की ब्लेंडिंग की जा रही है। वर्तमान में अनाज, गन्ना और मक्का से इथेनॉल का उत्पादन किया जा रहा है।

डीजल में ब्लेंडिंग से चल रही हैं 100 बसें

AIDA के प्रेसिडेंट विजेन्द्र सिंह ने बताया कि पेट्रोल-डीजल में ब्लेंडिंग कोई नई अवधारणा नहीं है। दुनिया के कई देशों में लंबे समय से इथेनॉल की ब्लेंडिंग हो रही है और इससे वाहनों को कोई नुकसान नहीं होता, बशर्ते वाहन बहुत पुराने न हों। उन्होंने कहा कि डीजल में आइसोब्यूटेनॉल की ब्लेंडिंग के तहत कर्नाटक स्टेट रोडवेज की 100 बसें पहले से ही चल रही हैं। यह प्रयोग सफल रहा है। जितना ज्यादा इथेनॉल का उत्पादन होगा, उतना ही किसानों को लाभ मिलेगा। उनका कहना है कि एक हजार करोड़ लीटर इथेनॉल उत्पादन पर किसानों को लगभग 72 हजार करोड़ रुपये तक का फायदा होता है।

2 हजार करोड़ लीटर तक उत्पादन क्षमता

विजेन्द्र सिंह ने बताया कि अभी तक पेट्रोल में ब्लेंडिंग के लिए करीब एक हजार करोड़ लीटर इथेनॉल का उत्पादन किया जा रहा था। लेकिन अब मशीनरी, तकनीक और कच्चे माल की उपलब्धता को देखते हुए उद्योग दो हजार करोड़ लीटर इथेनॉल उत्पादन की क्षमता तक पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि इस अतिरिक्त क्षमता का उपयोग डीजल के लिए आइसोब्यूटेनॉल बनाने में किया जा सकता है। इसके लिए उद्योग के पास सभी आवश्यक संसाधन मौजूद हैं और किसी तरह की बड़ी परेशानी की संभावना नहीं है। AIDA का मानना है कि यदि सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है तो इससे न केवल ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि किसानों की आय बढ़ेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नया बल मिलेगा।

ये भी पढ़ें: फरवरी की गुनगुनी धूप से खेतों में लौटी रौनक, किसानों में बढ़ा काम का उत्साह

Related posts

Leave a Comment