नई दिल्ली: खुरपका-मुंहपका (एफएमडी) बीमारी से पशुपालक अभी पूरी तरह उबर भी नहीं पाए थे कि लंपी स्किन डिजीज ने देशभर में पैर पसार लिए। एफएमडी की तरह लंपी भी पशुओं के लिए जानलेवा साबित हो रही है। वैक्सीन के जरिए दोनों बीमारियों पर कुछ हद तक नियंत्रण जरूर किया गया है, लेकिन लंपी की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। इसी बीच स्वाइन फ्लू और बर्ड फ्लू जैसी बीमारियों का खतरा भी सामने आ रहा है, जो केवल पशुओं तक सीमित नहीं रहतीं बल्कि इंसानों में भी फैल जाती हैं। लंपी से लेकर बर्ड फ्लू तक ये तमाम ऐसी बीमारियाँ हैं, जिसके प्रकोप से पशुधन को होने वाली हानि पशुपालकों की आर्थिक रूप से कमर तोड़ देती है।
वन हेल्थ अप्रोच के तहत शुरू हुआ NOHM
इंसानों में फैलने वाली बीमारियों के बढ़ते खतरे को देखते हुए वर्ल्ड लेवल पर नेशनल वन हेल्थर मिशन (NOHM) की शुरुआत की गई है। अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के सहयोग से भारत में भी इस मिशन की शुरुआत हो चुकी है। इस मिशन के दायरे में लंपी, एफएमडी, स्वाइन फ्लू, बर्ड फ्लू समेत कई संक्रामक बीमारियों को शामिल किया गया है। मिशन के तहत इन बीमारियों पर तीन स्तरों पर प्रभावी कार्रवाई की जाएगी।
लंपी समेत इन बीमारियों से निपटेगा मिशन
नेशनल वन हेल्थ मिशन के तहत लंपी जैसी घातक बीमारियों से निपटने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई है। जानकारों के अनुसार इस योजना के तहत तीन स्तरों पर कुल आठ बड़े कदम उठाए जाएंगे।
तीन स्तरों पर होगा रोग नियंत्रण
मिशन के तहत नेशनल और स्टेट लेवल पर महामारी की जांच के लिए संयुक्त टीमें बनाई जाएंगी। किसी भी बीमारी के फैलने की स्थिति में यही टीमें तुरंत रिस्पॉन्स करेंगी। सभी पशुओं की बीमारियों की निगरानी के लिए एक मजबूत सर्विलांस सिस्टम विकसित किया जाएगा। इसके साथ ही मिशन के रेगुलेटरी सिस्टम को और मजबूत किया जाएगा, जिसमें नंदी ऑनलाइन पोर्टल और फील्ड टेस्टिंग गाइडलाइंस शामिल होंगी।
समय से चेतावनी और तेजी से इलाज पर फोकस
महामारी फैलने से पहले लोगों को चेतावनी देने के लिए अर्ली वॉर्निंग सिस्टम तैयार किया जाएगा। नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी के साथ मिलकर महामारी की गंभीरता को जल्द से जल्द कम करने पर काम होगा। प्राथमिक रोगों के लिए टीके और इलाज विकसित करने के लिए तय अनुसंधान को आगे बढ़ाया जाएगा। इसके अलावा जीनोमिक और पर्यावरणीय निगरानी के जरिए रोग की पहचान के समय और संवेदनशीलता में सुधार किया जाएगा।
क्यों जरूरी था NOHM
एनिमल एक्सपर्ट्स के मुताबिक कोविड-19, स्वाइन फ्लू, एशियन फ्लू, इबोला, जीका वायरस, एवियन इंफ्लूंजा जैसी कई महामारियां पशु-पक्षियों से इंसानों में फैली हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार जंगलों में करीब 1.7 मिलियन वायरस मौजूद हैं, जिनमें से बड़ी संख्या जूनोटिक है। जूनोटिक बीमारियां वे होती हैं जो पशुओं से इंसानों में फैलती हैं। हर साल दुनिया भर में जूनोटिक बीमारियों के करीब एक बिलियन मामले सामने आते हैं और लगभग एक मिलियन मौतें होती हैं। इसी खतरे को देखते हुए वर्ल्ड लेवल पर पहल शुरू की गई है और भारत में NOHM के रूप में इस अभियान को लागू किया गया है।
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