खेती-किसानी

बरसात के मौसम में अमरूद की फसल पर होता है एन्थ्रक्नोज़ रोग का खतरा, समय पर उपचार है ज़रूरी

नई दिल्ली: बरसात का मौसम अमरूद की खेती करने वाले किसानों के लिए जितना राहत लेकर आता है, उतना ही संकट भी खड़ा कर देता है। इस मौसम में अमरूद के पौधों पर एक घातक फफूंदजनित रोग  एन्थ्रक्नोज़ तेजी से फैलता है, जिससे न केवल पैदावार घटती है, बल्कि फल भी बाजार में बिकने लायक नहीं रह जाते। जुलाई से सितंबर के महीनों के बीच बढ़ी हुई नमी इस रोग के लिए अनुकूल माहौल तैयार करती है, जिससे समय रहते पहचान और नियंत्रण बेहद आवश्यक हो जाता है।

कैसे होता है एन्थ्रक्नोज़ का हमला?

डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा-समस्तीपुर, बिहार के पादप रोग विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. एस.के. सिंह के अनुसार यह रोग Colletotrichum नामक फफूंद के कारण होता है। सबसे पहले जुलाई-अगस्त में यह पौधों की नई कोमल पत्तियों और टहनियों पर हमला करता है। रोगग्रस्त पत्तियों पर चॉकलेटी रंग के अनियमित धब्बे बनते हैं, जिससे पत्ते पीले पड़कर झड़ने लगते हैं। साथ ही फूल बनने से पहले ही कलियां गिर जाती हैं और पूरी टहनियां सूखने लगती हैं। फलों पर काले, धंसे हुए धब्बे दिखाई देते हैं और अंदर से वे सड़ने लगते हैं।

समझदारी से किया गया प्रबंधन ही है उपाय

रोग नियंत्रण के लिए एकीकृत प्रबंधन जरूरी है। डॉ. सिंह के अनुसार अमरूद के बाग की साफ-सफाई बनाए रखना सबसे पहला कदम है। संक्रमित पत्तियों, फलों और टहनियों को तुरंत काटकर नष्ट करें ताकि फफूंद का प्रसार रोका जा सके। पेड़ों की नियमित छंटाई करें ताकि हवा और धूप का संचार बना रहे। कटाई के बाद पेड़ की सूखी टहनियों को काटकर उनके कटे हिस्सों पर कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का गाढ़ा पेस्ट लगाना चाहिए। इसके अलावा, टहनियों पर पानी का सीधा छिड़काव न करें और उर्वरकों का संतुलित प्रबंधन बनाए रखें।

रासायनिक नियंत्रण भी है कारगर विकल्प

यदि रोग ज्यादा फैल चुका हो, तो डॉ. सिंह रासायनिक उपाय अपनाने की सलाह देते हैं। हेक्साकोनाजोल या प्रोपिकोनाजोल नामक फफूंदनाशी को 2 मिली प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। साथ ही उसमें 0.5 मिली स्टिकर मिलाना भी जरूरी है ताकि दवा पत्तियों पर टिके। पहला छिड़काव फूल आने से 15 दिन पहले और दूसरा छिड़काव फल लगने के बाद किया जाना चाहिए। इसके अलावा, कार्बेन्डाजिम 12% + मैनकोजेब 63% का उपयोग भी फायदेमंद है। इसकी 3 ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करने से रोग की उग्रता को रोका जा सकता है। 25 जून के आसपास इसका छिड़काव करने से बरसात के मौसम में रोग का प्रकोप काफी हद तक कम हो जाता है और सर्दियों की फसल सुरक्षित रहती है।

रोगमुक्त बाग और बेहतर आमदनी

समय पर उचित पहचान और वैज्ञानिक प्रबंधन से अमरूद के बागों को एन्थ्रक्नोज़ रोग से बचाया जा सकता है। यह न केवल पैदावार को बनाए रखने में मदद करता है, बल्कि फलों की गुणवत्ता और बाजार में बिक्री योग्य मूल्य को भी बरकरार रखता है। किसान यदि इन उपायों को गंभीरता से अपनाएं, तो बरसात का यह चुनौतीपूर्ण मौसम भी फायदे का सौदा साबित हो सकता है।

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