पटना: चीनी उद्योग को दोबारा मजबूती देने की दिशा में बिहार सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। बिहार में 25 नई चीनी मिलों की स्थापना और वर्षों से बंद पड़ी मिलों के पुनरुद्धार की प्रक्रिया को तेज करते हुए गन्ना उद्योग विभाग ने प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई शुरू कर दी है। इसी क्रम में गन्ना उद्योग विभाग के अपर मुख्य सचिव के. सेंथिल कुमार ने राज्य के 14 जिलों के जिलाधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर जमीन चिन्हित कर विस्तृत रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया है।
बंद मिलों के साथ 25 नई चीनी मिलें लगाने की योजना
राज्य सरकार का लक्ष्य है कि चीनी उद्योग से जुड़े निवेश प्रस्तावों में किसी तरह की देरी न हो और परियोजनाओं पर तेजी से अमल किया जा सके। इसके तहत बंद पड़ी चीनी मिलों को दोबारा चालू करने के साथ-साथ करीब 25 नई चीनी मिलें स्थापित करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ-साथ किसानों को भी अपनी उपज का बेहतर बाजार उपलब्ध होगा।
हर नई मिल के लिए 100 एकड़ जमीन अनिवार्य
अपर मुख्य सचिव द्वारा भेजे गए पत्र में स्पष्ट किया गया है कि प्रत्येक नई चीनी मिल के लिए लगभग 100 एकड़ जमीन की आवश्यकता होगी। जिलों में उपलब्ध सरकारी और निजी भूमि की समीक्षा कर उपयुक्त स्थल का चयन किया जाएगा। भूमि चयन के साथ-साथ यह भी देखा जाएगा कि संबंधित क्षेत्र में गन्ना उत्पादन की संभावनाएं कितनी हैं।
30 से 40 हजार एकड़ क्षेत्र में गन्ना खेती जरूरी
गन्ना उद्योग विभाग के अनुसार, किसी भी चीनी मिल के सुचारु संचालन के लिए उसके आसपास कम से कम 30 से 40 हजार एकड़ क्षेत्र में गन्ना की खेती होना जरूरी है। ऐसे में सिंचाई सुविधा, कृषि संसाधन, सड़क संपर्क और किसानों की तैयारियों का भी आकलन किया जाएगा।
हाई लेवल कमेटी और टास्क फोर्स का गठन
यह पहल सात निश्चय-3 के अंतर्गत “समृद्ध उद्योग–सशक्त बिहार” के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में अहम मानी जा रही है। इसके लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय कमेटी के गठन को मंजूरी दी गई है, जो नीति निर्धारण और कार्ययोजना को अंतिम रूप देगी। साथ ही, भूमि चयन और गन्ना उत्पादन से जुड़े सभी पहलुओं पर विचार के लिए विशेष कृषि टास्क फोर्स बनाने का भी निर्देश दिया गया है।
इन 14 जिलों से मांगी गई रिपोर्ट
नई चीनी मिलों की स्थापना और पुरानी मिलों के पुनरुद्धार के लिए जिन 14 जिलों से रिपोर्ट मांगी गई है, उनमें पटना, नवादा, वैशाली, सारण, सीवान, गोपालगंज, बेतिया, मोतिहारी, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, गया, शिवहर, रोहतास और पूर्णिया शामिल हैं। सरकार के इस कदम से बिहार में गन्ना किसानों को बड़ा सहारा मिलने की उम्मीद है और चीनी उद्योग को फिर से रफ्तार मिलने का रास्ता साफ हो सकता है।
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