मुजफ्फरपुर: इस वर्ष लगातार बदलते मौसम की मार का असर लीची की खेती पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। कई जिलों के बागानों में पेड़ों पर मंजर तो आए हैं, लेकिन उनकी संख्या सामान्य वर्षों की तुलना में काफी कम है। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि यही मंजर आगे चलकर फल बनते हैं और उत्पादन का आधार होते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार सर्दियों के दौरान तापमान अधिक रहने से पेड़ों में नए पत्ते निकल आए, जिससे मंजर बनने की प्राकृतिक प्रक्रिया प्रभावित हुई और उत्पादन पर खतरा बढ़ गया है।
सिंचाई में सावधानी जरूरी
पिछले दिनों बारिश न होने से कई क्षेत्रों में मिट्टी सूखने लगी है। ऐसे स्थानों पर किसान हल्की सिंचाई कर सकते हैं, लेकिन विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अधिक पानी देना मंजर को नुकसान पहुंचा सकता है। उन्होंने सलाह दी कि नियमित सिंचाई फल बनने के बाद ही की जाए। जिन इलाकों में बारिश हुई है, वहां यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि पानी अधिक मात्रा में जमा न हो, क्योंकि इससे भी नुकसान की संभावना रहती है।
मंजर में रोग और कीट का खतरा
इस समय लीची के मंजर पर इन्फ्लोरेसेंस ब्लाइट रोग का खतरा बढ़ जाता है, जिससे मंजर सूखने लगते हैं और उत्पादन कम हो सकता है। इससे बचाव के लिए विशेषज्ञ दो ग्राम रोको दवा को एक लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करने की सलाह दे रहे हैं। इसके अलावा लीची बग नामक कीट भी फसल को नुकसान पहुंचा सकता है। इसके नियंत्रण के लिए अलान्टो कीटनाशक का छिड़काव करने और पेड़ों से गिरने वाले कीड़ों को इकट्ठा कर नष्ट करने की सलाह दी गई है, ताकि उनका प्रकोप न बढ़े।
तापमान नियंत्रित करने के लिए मिनी स्प्रिंकलर उपयोगी
आने वाले समय में तापमान बढ़ने की संभावना को देखते हुए वैज्ञानिकों ने बागानों में मिनी स्प्रिंकलर प्रणाली लगाने की सलाह दी है। इससे पेड़ों के नीचे का तापमान लगभग चार से पाँच डिग्री तक कम किया जा सकता है। यह प्रणाली फलों के जलने, फटने और गिरने की समस्या को कम करने में सहायक साबित होती है। सरकार इस तकनीक पर लगभग अस्सी प्रतिशत तक सब्सिडी भी प्रदान कर रही है, जिससे किसान कम लागत में अपनी फसल को गर्मी और मौसम के प्रतिकूल प्रभावों से बचा सकते हैं।
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