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यूपी मीन महोत्सव 2026 से मत्स्य क्षेत्र को नई दिशा

UP Meen Mahotsav

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मत्स्य क्षेत्र को आधुनिक तकनीक, निवेश और उद्यमिता से जोड़ने के उद्देश्य से दो दिवसीय यूपी मीन महोत्सव और एक्वा एक्सपो 2026 का आयोजन इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ भारत सरकार के केंद्रीय राज्य मंत्री मत्स्य पालन, पशुपालन, डेयरी और पंचायतीराज प्रो. एस.पी. सिंह बघेल तथा प्रदेश के मत्स्य विकास मंत्री डॉ. संजय कुमार निषाद ने किया। आयोजन में देश-प्रदेश के वैज्ञानिकों, उद्यमियों और विभिन्न जनपदों से आए लगभग एक हजार मत्स्य पालकों ने भाग लिया।

एक्सपो में 50 कंपनियों की भागीदारी

एक्वा एक्सपो में 50 नामचीन कंपनियों ने अपने स्टॉल लगाए, जहां आधुनिक हैचरी, फीड, केज कल्चर, कोल्ड चेन, लॉजिस्टिक्स और मूल्य संवर्धन से जुड़ी तकनीकों का प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम का सीधा प्रसारण प्रदेश के सभी 75 जिलों में किया गया। फिश फूड कोर्ट और प्रोटीन जागरूकता अभियान के माध्यम से मत्स्य उत्पादों के पोषण महत्व को भी रेखांकित किया गया।

किसानों की आय बढ़ाने पर जोर

उद्घाटन सत्र में प्रो. एस.पी. सिंह बघेल ने कहा कि किसानों की आर्थिक मजबूती के बिना देश की समृद्धि संभव नहीं है। उन्होंने मत्स्य पालकों को कृषि दर पर बिजली उपलब्ध कराने और प्रदेश में एनएफडीबी केंद्र खोलने की दिशा में प्रयास तेज करने की बात कही। उनके अनुसार ऐसे आयोजनों से आधुनिक तकनीक का प्रसार होगा और मत्स्य पालन को अधिक लाभकारी बनाया जा सकेगा।

मत्स्य उत्पादन में यूपी तीसरे स्थान पर

डॉ. संजय कुमार निषाद ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश मत्स्य उत्पादन में देश का तीसरा सबसे बड़ा राज्य बन चुका है। प्रदेश में उत्पादन वृद्धि दर 115.5 प्रतिशत तक पहुंच गई है और बीते छह वर्षों में वार्षिक उत्पादन बढ़कर 13.3 लाख मीट्रिक टन हो गया है। वर्ष 2026-27 के बजट में मत्स्य विभाग के लिए 114.20 करोड़ रुपये की नई राज्य सहायता भी स्वीकृत की गई है। उन्होंने अमृत सरोवरों को मत्स्य पालन योग्य बनाने, तालाबों के पट्टों का समय पर आवंटन और वैज्ञानिक तकनीकों के अधिक उपयोग पर बल दिया।

औद्योगिक स्तर पर विकास की तैयारी

कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने कहा कि वैज्ञानिक पद्धतियों, गुणवत्तायुक्त मत्स्य बीज, बेहतर फीड और बाजार से सीधा जुड़ाव प्रदेश को अगले पांच वर्षों में अग्रणी राज्यों में शामिल कर सकता है। अपर मुख्य सचिव मत्स्य मुकेश कुमार मेश्राम ने बताया कि प्रदेश में छह लाख हेक्टेयर से अधिक जलक्षेत्र उपलब्ध है, जहां प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन के माध्यम से आय बढ़ाई जा सकती है।

आयोजन में प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना, किसान समृद्धि योजना और फिशरीज एवं एक्वाकल्चर डेवलपमेंट फंड जैसी योजनाओं की जानकारी भी दी गई। इंटीग्रेटेड एक्वापार्क, मत्स्य मंडियों, मोती की खेती और वर्ल्डफिश प्रोजेक्ट सेंटर जैसी पहलों से प्रदेश में रोजगार, पोषण सुरक्षा और एक्वा पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई गई। मीन महोत्सव को उत्तर प्रदेश में मत्स्य पालन को आत्मनिर्भर, तकनीकी रूप से सशक्त और औद्योगिक स्तर पर विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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