कृषि समाचार

खाद सब्सिडी DBT पर शिवराज सिंह चौहान की सहमति

Fertilizer Subsidy DBT

नई दिल्ली: केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खाद सब्सिडी (DBT) सीधे किसानों के बैंक खातों में स्थानांतरित करने के लंबे समय से लंबित प्रस्ताव पर सहमति जताई है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि इस बदलाव को लागू करने के लिए एक कार्यक्षम व्यवस्था तैयार की जाए। बुधवार को नई दिल्ली स्थित इंडियन एग्रीकल्चरल रिसर्च इंस्टीट्यूट में आयोजित वार्षिक किसान मेले के उद्घाटन अवसर पर मंत्री ने कहा कि खाद सब्सिडी के मौजूदा ढांचे में सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में 1.70 लाख करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी कंपनियों को दी जाती है, जिसे सीधे किसानों को दिया जा सकता है।

सस्ती दरों पर मिल रही खाद

मंत्री ने कहा कि 45 किलोग्राम का यूरिया बैग 266 रुपये में और 50 किलोग्राम का डाई अमोनियम फॉस्फेट 1,350 रुपये में उपलब्ध है। उन्होंने उपस्थित किसानों और वैज्ञानिकों से इनकी वास्तविक बाजार कीमत का अनुमान लगाने को कहा और स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार किसानों को सस्ती दर पर खाद उपलब्ध कराने के लिए भारी सब्सिडी दे रही है। नीति के अनुसार यूरिया पूरी तरह सरकार के नियंत्रण में है, जबकि अन्य उर्वरकों का अधिकतम खुदरा मूल्य नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश और सल्फर पर तय सब्सिडी को ध्यान में रखकर कंपनियां निर्धारित करती हैं। वर्तमान में नाइट्रोजन पर 43.02 रुपये प्रति किलोग्राम, फास्फोरस पर 47.96 रुपये, पोटाश पर 2.38 रुपये और सल्फर पर 2.87 रुपये प्रति किलोग्राम की सब्सिडी निर्धारित है।

खाद आपूर्ति को लेकर शिकायतें

चौहान ने बताया कि कई स्थानों से शिकायतें मिली हैं कि पर्याप्त आपूर्ति और भारी सब्सिडी के बावजूद किसानों को समय पर खाद नहीं मिली। कुछ मामलों में सब्सिडी वाली यूरिया अन्य क्षेत्रों में भेज दी गई। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या खाद सब्सिडी सीधे किसानों के खातों में भेजी जानी चाहिए। उन्होंने मंत्रालय के अधिकारियों से इस प्रस्ताव पर विचार करने और आम सहमति बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। मंत्री ने कहा कि इस मुद्दे पर खुली चर्चा होनी चाहिए और एक व्यवहारिक प्रणाली तैयार करनी होगी।

सब्सिडी का बढ़ता बोझ

एक आधिकारिक अध्ययन के अनुसार, देश के 65 प्रतिशत किसानों ने वर्ष 2024-25 में 5 से 7 बैग यूरिया की खरीद की। वहीं 330 में से 163 जिलों में प्रति जिले 22 लाख बैग या 1 से 1.8 लाख टन यूरिया की खपत दर्ज की गई।

मौजूदा वित्त वर्ष में फास्फोरस और पोटाश पर सब्सिडी का बजट अनुमान 49,000 करोड़ रुपये था, जिसे संशोधित कर 60,000 करोड़ रुपये किया गया। बाद में इसे 54,000 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया। भारत पोटाश और फास्फोरस के मामले में 90 प्रतिशत से अधिक आयात पर निर्भर है, जिससे सब्सिडी का वित्तीय दबाव और बढ़ जाता है।

खाद सब्सिडी को लेकर सरकार जहां पारदर्शिता और दक्षता की दिशा में सुधार की बात कर रही है, वहीं विशेषज्ञ इसे जटिल और संवेदनशील मुद्दा मानते हैं, जिस पर व्यापक विमर्श की आवश्यकता बताई जा रही है।

ये भी पढ़ें: घर बैठे दूध-दही की होगी जांच, FSSAI की मोबाइल लैब सेवा शुरू

Related posts

Leave a Comment