मुंबई: महाराष्ट्र में प्याज भुगतान पर राज्य के खाद्य और औषधि प्रशासन मंत्री जयकुमार रावल ने बड़ी जानकारी दी है। उन्होंने कहा है कि प्याज की खरीद का बकाया चुकाने की प्रक्रिया जारी है और एजेंसी स्तर पर भुगतान का काम चल रहा है। उन्होंने स्वीकार किया कि भुगतान में देरी के कारण इस वर्ष की शुरुआत में नासिक में किसानों को विरोध प्रदर्शन करना पड़ा था।
नासिक में किसानों ने किया था प्रदर्शन
विधानसभा में लिखित जवाब देते हुए मंत्री ने बताया कि किसानों ने 5 जनवरी को नासिक स्थित नाफेड कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया था। उस समय एनसीसीएफ से जुड़ा लगभग 20 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित था। उन्होंने भरोसा दिलाया कि बकाया राशि का निपटारा प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है। मंत्री के अनुसार, नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (NAFED) और नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (NCCF) ने पिछले वर्ष जून से अगस्त के बीच बड़ी मात्रा में प्याज की खरीद की थी।
प्रशासनिक कारणों से हुई देरी
जयकुमार रावल ने कहा कि केंद्र की प्राइस स्टेबिलाइजेशन फंड योजना के तहत अधिकांश किसानों को समय पर भुगतान किया गया, लेकिन कुछ मामलों में प्रशासनिक कारणों से देरी हुई। उन्होंने यह भी बताया कि खरीफ और देर से हुई खरीफ फसल के दौरान अधिक बारिश ने राज्य में प्याज उत्पादन को प्रभावित किया। उन्होंने माना कि निर्यात पर रोक, कीट हमले, बढ़ती लागत और बाजार में कम कीमतों के कारण किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है।
35 रुपये प्रति किलो की मांग
मंत्री ने बताया कि किसान संगठनों ने 18 सितंबर 2025 से पुणे जिले के दौंड तालुका में प्याज के लिए 35 रुपये प्रति किलो की उचित कीमत की मांग को लेकर आंदोलन शुरू किया था। निर्यात से जुड़े मुद्दों पर उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने केंद्र से प्याज पर 20 प्रतिशत निर्यात शुल्क हटाने की मांग की थी। लगातार प्रयासों के बाद 22 मार्च 2025 को केंद्र सरकार ने अधिसूचना जारी कर यह शुल्क समाप्त कर दिया।इसके अलावा, राज्य सरकार ने निर्यातित उत्पादों पर शुल्क और कर में छूट योजना के तहत निर्यात प्रोत्साहन दर को 1.9 प्रतिशत से बढ़ाकर 4 प्रतिशत करने की मांग भी की है, ताकि प्याज निर्यातकों को सहारा मिले और बाजार में कीमतों को स्थिर रखा जा सके।
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