लखनऊ, 30 जुलाई 2026: उत्तर प्रदेश सरकार कृषि व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, आधुनिक और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। खरीफ मौसम 2026 में किसानों की फसलों का सटीक रिकॉर्ड तैयार करने, उत्पादन का सही आकलन करने और सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्र किसानों तक पहुंचाने के लिए डिजिटल क्रॉप सर्वे अभियान का विस्तार किया जाएगा। इसी संबंध में प्रदेश के मुख्य सचिव एसपी गोयल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को आवश्यक तैयारियां समय पर पूरी करने के निर्देश दिए।
16 अगस्त से शुरू होगा डिजिटल फसल सर्वे
मुख्य सचिव ने बताया कि खरीफ मौसम 2026 के लिए ई-खसरा पड़ताल यानी डिजिटल क्रॉप सर्वे अभियान 16 अगस्त 2026 से शुरू किया जाएगा। अभियान के सफल संचालन के लिए सभी जिलाधिकारियों को पर्याप्त संख्या में सर्वेयरों का चयन, उनका पंजीकरण और प्रशिक्षण समय पर पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि सर्वे शुरू होने से पहले प्रत्येक सर्वेयर को उसका कार्यक्षेत्र आवंटित कर दिया जाए।
सर्वे से तैयार होगा फसलों का सटीक रिकॉर्ड
डिजिटल क्रॉप सर्वे के माध्यम से खेतों में बोई गई फसलों का वास्तविक विवरण तैयार किया जाएगा। इससे फसल उत्पादन का सटीक आकलन संभव होगा और कृषि योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बढ़ेगी। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से किसानों को योजनाओं का लाभ समय पर और सही तरीके से मिल सकेगा।
किसान पंजीकरण अभियान में लाई जाएगी तेजी
बैठक के दौरान किसान पंजीकरण अभियान की भी समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को नियमित निगरानी कर पंजीकरण की गति बढ़ाने और अधिक से अधिक किसानों का पंजीकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जिन जिलों में प्रगति अपेक्षाकृत धीमी है, वहां विशेष अभियान चलाने के लिए कहा गया है, ताकि निर्धारित लक्ष्य समय पर पूरा किया जा सके।
दो जिलों ने पूरा किया शत-प्रतिशत लक्ष्य
सरकारी समीक्षा के अनुसार प्रदेश में निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले लगभग 85 प्रतिशत किसानों का पंजीकरण पूरा हो चुका है। इस उपलब्धि के साथ उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय स्तर पर दसवें स्थान पर पहुंच गया है। गाजियाबाद और रामपुर ऐसे जिले हैं, जहां निर्धारित लक्ष्य के अनुसार शत-प्रतिशत किसान पंजीकरण पूरा कर लिया गया है। वहीं भूमि अभिलेखों में हिस्सेदारी निर्धारण का कार्य भी लगभग 88.92 प्रतिशत पूरा हो चुका है। अमरोहा, हरदोई, पीलीभीत, शाहजहांपुर, महोबा, बहराइच, हमीरपुर, मुरादाबाद और ललितपुर इस कार्य में अग्रणी जिलों में शामिल हैं।
दुग्ध उत्पादन बढ़ाने पर भी सरकार का जोर
बैठक में दुग्ध विकास से जुड़े कार्यक्रमों की भी समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक गांव में दुग्ध सहकारी समितियों के गठन को बढ़ावा दिया जाए, ताकि दुग्ध उत्पादकों को गांव स्तर पर ही उचित मूल्य पर दूध बेचने की सुविधा मिल सके। उन्होंने संबंधित योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार कर अधिक से अधिक पात्र लाभार्थियों तक लाभ पहुंचाने पर भी जोर दिया।
अगस्त में हर जिले में होगा दुग्ध सम्मेलन
सरकार ने आगामी अगस्त माह में प्रदेश के प्रत्येक जिले में दुग्ध सम्मेलन आयोजित करने का निर्णय लिया है। इन कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और बैंक प्रतिनिधियों की भागीदारी होगी। सम्मेलन के माध्यम से दुग्ध उत्पादकों को विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जाएगी, उनकी समस्याएं सुनी जाएंगी और समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
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