कृषि पिटारा

प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता में राजस्थान नंबर वन

Per capita milk availability

राजस्थान: ‘दूध-दही का खाना नंबर वन हरियाणा’ कहावत अब बदलती नजर आ रही है। केंद्रीय पशुपालन और डेयरी मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट के अनुसार प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता के मामले में राजस्थान ने हरियाणा को पीछे छोड़ दिया है। लंबे समय तक इस सूची में पंजाब और हरियाणा शीर्ष पर रहे, लेकिन अब राजस्थान ने दूसरा स्थान हासिल कर लिया है।

प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता में राजस्थान की छलांग

मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2025 में राजस्थान में प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता बढ़कर 1229 ग्राम प्रतिदिन हो गई है, जबकि हरियाणा में यह आंकड़ा 1128 ग्राम दर्ज किया गया है। पंजाब अभी भी 1318 ग्राम प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता के साथ पहले स्थान पर बना हुआ है। इस तरह राजस्थान ने हरियाणा को पीछे छोड़ते हुए देश में दूसरा स्थान हासिल किया है।

छह साल में राजस्थान की तेज रफ्तार

अगर 2018-19 के आंकड़ों से तुलना की जाए तो राजस्थान में प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता में करीब 45 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। उस समय राजस्थान में यह आंकड़ा 850 ग्राम था, जो अब 1229 ग्राम तक पहुंच गया है। वहीं हरियाणा में बीते छह साल में यह वृद्धि महज 12 प्रतिशत रही है। यही अंतर राजस्थान को आगे ले जाने का बड़ा कारण बना है।

दूध उत्पादन में भी मजबूत स्थिति

कुल दूध उत्पादन के मामले में भी राजस्थान देश में दूसरे स्थान पर पहुंच चुका है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान देश के शीर्ष तीन दुग्ध उत्पादक राज्य हैं। इसके विपरीत पंजाब और हरियाणा अब टॉप-1 की सूची से काफी पीछे नजर आ रहे हैं। खास बात यह है कि कर्नाटक ने भी बीते छह साल में दूध उत्पादन में करीब 68 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज कर तेज प्रगति दिखाई है।

देश में औसतन दूध उपलब्धता

देशभर में प्रति व्यक्ति औसतन 485 ग्राम दूध उपलब्ध है। भारत में पिछले वर्ष करीब 25 करोड़ टन दूध का उत्पादन हुआ। राज्यों के स्तर पर देखें तो पंजाब, राजस्थान और हरियाणा शीर्ष राज्यों में शामिल हैं, जबकि कर्नाटक, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्य तेजी से अपनी स्थिति मजबूत कर रहे हैं।

अन्य राज्यों के आंकड़े

बीते छह साल में प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता में

  • कर्नाटक में 68 प्रतिशत बढ़ोतरी (332 से 559 ग्राम)
  • राजस्थान में 45 प्रतिशत बढ़ोतरी (850 से 1229 ग्राम)
  • मध्य प्रदेश में 31 प्रतिशत बढ़ोतरी (538 से 707 ग्राम)
  • महाराष्ट्र में 36 प्रतिशत बढ़ोतरी (264 से 358 ग्राम)
  • उत्तर प्रदेश में 19 प्रतिशत बढ़ोतरी (377 से 447 ग्राम)
  • बिहार में 25 प्रतिशत बढ़ोतरी (228 से 285 ग्राम) दर्ज की गई है।

बदलता दुग्ध परिदृश्य

विशेषज्ञों के अनुसार बेहतर नस्ल सुधार, चारा प्रबंधन, सहकारी डेयरी मॉडल और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से राजस्थान ने यह बढ़त हासिल की है। आंकड़े साफ संकेत दे रहे हैं कि देश के दुग्ध क्षेत्र में संतुलन तेजी से बदल रहा है और राजस्थान अब इस क्षेत्र में एक मजबूत शक्ति के रूप में उभर चुका है।

ये भी पढ़ें: उत्तर प्रदेश में गोवंश संरक्षण और हरा चारा उत्पादन को प्रोत्साहन

Related posts

Leave a Comment