पटना: अक्टूबर का महिना शुरू हो चुका है और इसके साथ ही मॉनसून सीजन भी अपने अंतिम चरण में पहुंच रहा है। इस समय धान की फसल में रोग और कीट प्रकोप का खतरा बढ़ जाता है। इसी को देखते हुए बिहार कृषि विभाग ने किसानों को महत्वपूर्ण सलाह जारी की है। विभाग ने खास तौर पर खैरा रोग और गंधी कीट प्रकोप से बचाव के उपाय बताए हैं। साथ ही, किसानों की सुविधा के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म और कृषि ऐप के जरिए भी जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। अक्टूबर में धान की फसल रोगों के संक्रमण के लिहाज से एक संवेदनशील महिना है।
धान की फसल में खैरा और गंधी रोग क्या है?
- खैरा रोग: धान के पौधों की निचली पत्तियों पर भूरे-कत्थई रंग के धब्बे दिखाई देते हैं। धीरे-धीरे पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं और पौधों की वृद्धि रुक जाती है।
- गंधी रोग: धान की पत्तियों पर हरे-भूरे या भूरे धब्बे बनते हैं, जो बाद में सूखकर भूरे-काले हो जाते हैं। गंभीर स्थिति में पूरी पत्ती सूख जाती है और फसल की पैदावार घट जाती है। प्रभावित पौधों से हल्की गंध भी आती है।
कृषि वैज्ञानिकों की सलाह
- खैरा रोग की रोकथाम के लिए:
- 5 किलोग्राम जिंक सल्फेट
- 2.5 किलोग्राम बुझा हुआ चूना
- 500 लीटर पानी प्रति हेक्टेयर
इनका छिड़काव करने से रोग पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
- गंधी कीट प्रकोप रोकने के लिए:
- मिथाइल पैराथियॉन (2%) या मालाथियॉन (5%)
- 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से सुबह भुरकाव
- खेत में 5 सेंटीमीटर पानी का स्तर बनाए रखना आवश्यक है।
मिर्च की बुआई का सही समय
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सितंबर माह के अंत तक मिर्च की बुआई करने की सलाह दी है। किसानों को हर हाल में अक्टूबर के शुरुआती तक यह कार्य कर लेना चाहिए। इस समय पर बुआई करने से पौधे मजबूत बनते हैं और उत्पादन बेहतर होता है।
कृषि ऐप से किसानों को मिल रही सुविधा
बिहार कृषि विभाग ने किसानों की सुविधा के लिए कृषि ऐप लॉन्च किया है। इसके जरिए किसान निम्नलिखित सुविधाएं पा सकते हैं:
- सरकारी योजनाओं की जानकारी
- फसल प्रबंधन और तकनीकी सलाह
- बाजार मूल्य की अपडेट
- कृषि योजनाओं में ऑनलाइन आवेदन
- अनुदान और स्वीकृति की वास्तविक समय जानकारी
यह ऐप किसानों के लिए एकीकृत योजना पोर्टल के रूप में काम कर रहा है, जिससे वे खेती से जुड़ी सभी सेवाओं का लाभ घर बैठे उठा सकते हैं।
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