नई दिल्ली: इस साल देश के किसानों का रुझान तेजी से सरसों की खेती की ओर बढ़ा है और इसके शुरुआती संकेत भी सकारात्मक नजर आ रहे हैं। दिसंबर के मध्य तक आए ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देश में सरसों की खेती का रकबा पिछले साल की तुलना में बढ़ गया है। अनुकूल मौसम, समय पर बुवाई और बेहतर बाजार उम्मीदों के चलते किसानों ने बड़ी संख्या में सरसों की खेती को चुना है। 15 दिसंबर 2025 तक देश में करीब 84.67 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सरसों की बुवाई हो चुकी है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा लगभग 81.16 लाख हेक्टेयर था। यानी इस बार सरसों का रकबा करीब 4.3 प्रतिशत बढ़ा है, जिसे रबी सीजन 2025-26 के लिए एक मजबूत संकेत माना जा रहा है।
प्रमुख राज्यों में सरसों की खेती में इजाफा
‘फाइनेंशियल एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा और पश्चिम बंगाल जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में रबी सीजन 2025-26 के दौरान सरसों के रकबे में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इन राज्यों में अधिकांश फसलें इस समय शाखा निकलने से लेकर फूल आने या फली बनने की अवस्था में हैं। अच्छी बात यह है कि सभी प्रमुख उत्पादक राज्यों में खड़ी फसलों की स्थिति सामान्य बनी हुई है। सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) की सरसों फसल पर जारी तीसरी रिपोर्ट के मुताबिक, रस चूसने वाले कीटों का प्रकोप अभी आर्थिक नुकसान की सीमा से नीचे है और बुवाई गतिविधियां अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं।
खाद्य तेल उत्पादन को मिल सकता है बड़ा सहारा
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आने वाले महीनों में मौसम अनुकूल बना रहा, तो सरसों की पैदावार पिछले साल से बेहतर हो सकती है। राजस्थान के भरतपुर जिले के अस्तावन गांव स्थित उत्तान सरसों उत्पादक कंपनी के सीईओ रूप सिंह के अनुसार, इस बार फसल की स्थिति पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर है और फिलहाल किसी बड़े कीट प्रकोप की सूचना नहीं है। उन्होंने उम्मीद जताई कि मौजूदा मौसम बना रहा तो उत्पादन में अच्छी बढ़ोतरी होगी। अधिक उत्पादन से देश में खाद्य तेल की उपलब्धता बढ़ेगी और आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
इस समय किस अवस्था में है सरसों की फसल
कृषि मंत्रालय के अनुमान के मुताबिक, 2024-25 फसल वर्ष (जुलाई-जून) में सरसों के बीज का उत्पादन करीब 12.64 लाख टन रहने की संभावना है। SEA की रिपोर्ट में बताया गया है कि सरसों की फसल इस समय शाखा निकलने, फूल आने और फली बनने की अवस्था में है। जो फसलें जल्दी बोई गई थीं, उनमें बीज बनने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। सरसों एक प्रमुख तिलहन फसल है, जिसकी बुवाई आमतौर पर अक्टूबर से नवंबर के बीच होती है, जबकि इसकी कटाई फरवरी से मार्च के दौरान की जाती है।
राजस्थान और उत्तर प्रदेश में क्या है स्थिति
देश में तिलहन उत्पादन के लिहाज से सबसे बड़े राज्य राजस्थान में अब तक फसलों की स्थिति सामान्य बनी हुई है। हालांकि सितंबर और अक्टूबर में हुई अत्यधिक बारिश के कारण कुछ क्षेत्रों में दोबारा बुवाई करनी पड़ी थी। इसके बावजूद दिसंबर के मध्य तक सरसों की बुवाई का क्षेत्रफल पिछले साल की तुलना में थोड़ा अधिक रहा है। वहीं उत्तर प्रदेश में अक्टूबर में हुई बेमौसम बारिश के बावजूद सरसों की बुवाई अच्छी रही है। कुछ जिलों में अंकुरण जरूर प्रभावित हुआ था, लेकिन कुल मिलाकर राज्य में सरसों का रकबा 1.35 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जो पिछले साल से करीब 6.5 फीसदी अधिक है।
सरसों उत्पादन में राज्यों की हिस्सेदारी
देश में सरसों के बीज उत्पादन में राजस्थान की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा करीब 40 फीसदी है। इसके बाद मध्य प्रदेश 14 फीसदी, उत्तर प्रदेश 9 फीसदी और हरियाणा करीब 7 फीसदी योगदान देता है। रकबे और फसल की स्थिति में इस साल आई बढ़ोतरी से साफ है कि सरसों किसानों के लिए एक बार फिर लाभकारी फसल बनकर उभर रही है और आने वाले महीनों में इसके अच्छे नतीजे देखने को मिल सकते हैं।
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