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पश्चिम एशिया में जारी युद्ध से सरसों तेल महंगा, किसानों को फायदा

The ongoing war in West Asia mustered oil

जयपुर: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असर अब देश के खाद्य तेल बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। विदेशी तेल की आपूर्ति प्रभावित होने से सरसों के तेल की मांग तेजी से बढ़ गई है, जिससे इसके भाव में लगातार उछाल देखा जा रहा है। इसका सीधा लाभ सरसों उत्पादक किसानों को मिल रहा है।

विदेशी तेल की कमी से बढ़ी मांग

मलेशिया और अन्य देशों से आने वाले पाम और सोयाबीन तेल की आपूर्ति लगभग ठप हो गई है। ऐसे में बाजार में सरसों के तेल की मांग बढ़ गई है। विशेषज्ञों के अनुसार देश का तेल उद्योग काफी हद तक विदेशी आयात पर निर्भर है, लेकिन मौजूदा हालात में यह आपूर्ति बाधित हो गई है।

राजस्थान बना सरसों उत्पादन का केंद्र

देश में कुल सरसों उत्पादन का करीब पचास प्रतिशत हिस्सा राजस्थान से आता है। यहां अलवर, भरतपुर, झुंझुनू, सीकर, करौली और दौसा प्रमुख उत्पादन क्षेत्र हैं। खासकर अलवर सरसों तेल उत्पादन का बड़ा केंद्र बन चुका है, जहां से पूरे देश में आपूर्ति की जाती है।

किसानों को मिल रहे बेहतर दाम

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध की वजह से मौजूदा समय में सरसों के भाव समर्थन मूल्य से ऊपर चल रहे हैं। जहां समर्थन मूल्य लगभग छह हजार दो सौ रुपये प्रति क्विंटल है, वहीं खुले बाजार में कीमतें छह हजार आठ सौ रुपये तक पहुंच गई हैं। अच्छी पैदावार और बेहतर गुणवत्ता के कारण किसानों को अधिक लाभ मिल रहा है।

तेल की मात्रा बढ़ने से बढ़ा फायदा

इस बार सरसों की गुणवत्ता भी बेहतर बताई जा रही है। सामान्य तौर पर जहां चालीस प्रतिशत तेल निकलता है, वहीं इस बार बयालीस से तैंतालीस प्रतिशत तक तेल निकल रहा है। इससे किसानों की आय में और वृद्धि हो रही है।

उत्पादन में हल्की कमी, लेकिन असर सीमित

पिछले वर्ष देश में सरसों का उत्पादन लगभग एक सौ सत्रह लाख टन था, जबकि इस वर्ष इसके एक सौ ग्यारह लाख टन रहने का अनुमान है। हालांकि तेल की अधिक मात्रा निकलने से इस कमी की भरपाई होने की संभावना है।

भविष्य में बढ़ सकते हैं भाव

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में युद्ध लंबा खिंचता है, तो सरसों के तेल की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि इससे आम उपभोक्ताओं पर बोझ बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।

अलवर बना देश का बड़ा तेल केंद्र

अलवर में कई बड़े प्रसंस्करण संयंत्र और मिलें स्थापित हैं, जो सरसों तेल उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। यहां से देश के विभिन्न राज्यों में बड़े पैमाने पर तेल की आपूर्ति की जाती है। कुल मिलाकर मौजूदा परिस्थितियों में जहां किसानों को बेहतर कीमत मिल रही है, वहीं आम जनता को महंगे तेल का सामना करना पड़ सकता है। विशेषज्ञों की नजर अब इस बात पर है कि अंतरराष्ट्रीय हालात आगे किस दिशा में जाते हैं।

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