खेती-किसानी

लहसुन की खेती में तना फटने की समस्या, जानिए कारण और बचाव के उपाय

Garlic cultivation

लखनऊ: लहसुन की खेती में किसानों को एक आम लेकिन गंभीर समस्या का सामना करना पड़ता है, जिसमें लहसुन का तना नीचे या बीच से फट जाता है. इससे न सिर्फ लहसुन की चमक और गुणवत्ता खराब होती है, बल्कि भंडारण के दौरान सड़न भी जल्दी शुरू हो जाती है. नतीजतन मंडी में किसानों को उनकी उपज का सही दाम नहीं मिल पाता. प्रदेश के कई जिलों से इस तरह की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं.

तना फटने के मुख्य कारण

लहसुन का तना फटने के पीछे सबसे बड़ा कारण बोरॉन की कमी मानी जाती है. बोरॉन तने को मजबूती प्रदान करता है और इसकी कमी से तना कमजोर होकर आसानी से फट जाता है.

इसके अलावा जरूरत से ज्यादा यूरिया का प्रयोग भी फसल को नुकसान पहुंचाता है. कई किसान 70-80 दिन की फसल में भी यूरिया डालते रहते हैं, जिससे पौधा ऊपर से तो हरा दिखता है, लेकिन अंदर से कच्चा रह जाता है और तना फटने लगता है.

सिंचाई में असंतुलन भी बड़ी वजह है. लंबे समय तक खेत सूखा रहने के बाद अचानक अधिक पानी देने से पौधे के अंदर दबाव बढ़ जाता है, जिससे तना और छिलका फट जाता है.

कंद बनने के समय अगर तापमान अचानक बढ़ जाए, खासकर जनवरी के अंत और फरवरी की शुरुआत में, तो भी यह समस्या तेजी से सामने आती है.

तना फटने से होने वाला नुकसान

तना फटने से लहसुन की बाजार गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ता है. ऐसे लहसुन का भंडारण लंबे समय तक नहीं हो पाता और जल्दी सड़न शुरू हो जाती है. व्यापारी फटे तने वाले लहसुन को कम दाम पर खरीदते हैं, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है.

तना फटने से बचाव के पक्के उपाय

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार बोरॉन का छिड़काव करना बेहद जरूरी है. 15 लीटर पानी वाले पंप में 25-30 ग्राम बोरॉन (20%) मिलाकर स्प्रे करने से तना मजबूत होता है और लहसुन में चमक आती है.

फसल 60-65 दिन की होते ही यूरिया डालना पूरी तरह बंद कर देना चाहिए, क्योंकि इसके बाद यूरिया नुकसान पहुंचाता है.

कंद को मजबूत और छिलका सख्त बनाने के लिए 0:0:50 पोटाश का छिड़काव लाभकारी माना जाता है. इससे कंद का आकार और गुणवत्ता दोनों बेहतर होती हैं.

सिंचाई संतुलित रखें और खेत में लगातार हल्की नमी बनाए रखें. ज्यादा सूखने के बाद भारी सिंचाई न करें, क्योंकि खेत में पानी भरने से फसल खराब हो सकती है.

अगर पौधे की बढ़वार जरूरत से ज्यादा हो रही हो, तो ‘लिहोसिन’ या ‘चमत्कार’ दवा 25-30 मिली प्रति पंप की दर से छिड़काव किया जा सकता है. इससे फालतू बढ़वार रुकती है और पौधे की ताकत कंद के विकास में लगती है.

किसानों के लिए खास सलाह

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि लहसुन पकने के बाद उसे समय पर उखाड़ना बेहद जरूरी है. ज्यादा देर तक खेत में छोड़ने से तना और छिलका फटने की समस्या बढ़ जाती है, जिससे फसल की गुणवत्ता और कीमत दोनों प्रभावित होती हैं. सही समय पर कटाई और संतुलित पोषण अपनाकर किसान इस समस्या से आसानी से बच सकते हैं.

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