मंडी भाव

प्याज की कीमतों में भारी गिरावट से किसान नाराज, ये हैं ताज़ा कीमतें

नई दिल्ली: देशभर में प्याज उत्पादक किसान इन दिनों गहरी नाराजगी में हैं। खासतौर पर महाराष्ट्र के किसानों में रोष और चिंता लगातार बढ़ रही है। किसानों का कहना है कि पिछले कई महीनों से उन्हें प्याज की उपज का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है, जिससे उनकी लागत तक नहीं निकल पा रही। इस नाराजगी को और हवा तब मिली जब महाराष्ट्र के पुणे मंडी में प्याज की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई। यहां न्यूनतम भाव केवल 500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया, जो किसानों के लिए बड़ा झटका है। मॉडल रेट 1150 रुपये प्रति क्विंटल रहा, लेकिन अधिकांश किसानों को इससे भी कम दामों पर अपनी उपज बेचनी पड़ी।

महाराष्ट्र की प्रमुख मंडियों में भी हालात कुछ खास अलग नहीं हैं। पुणे (पिंपरी), मोशी और वाशी (नई मुंबई) मंडियों में भी प्याज के दाम अस्थिर दिखे। कुछ स्थानों पर अधिकतम भाव 1900 रुपये प्रति क्विंटल तक तो गया, लेकिन यह कुछ ही क्वालिटी के प्याज और सीमित मात्रा के लिए था। बड़ी संख्या में किसान न्यूनतम दरों पर ही प्याज बेचने को मजबूर हुए।

मध्य प्रदेश में भी स्थिति निराशाजनक रही। यहां की कई मंडियों में प्याज की कीमतें बेहद कम रहीं। सैलाना मंडी में प्याज का न्यूनतम भाव मात्र 398 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया। भोपाल मंडी में अधिकतम रेट 1600 रुपये तक जरूर गया, लेकिन औसतन ज्यादातर मंडियों में किसानों को 800 से 1000 रुपये प्रति क्विंटल के बीच दाम मिले, जो लागत के मुकाबले बेहद कम हैं।

देश के अन्य राज्यों की बात करें तो उत्तर प्रदेश, हरियाणा, गुजरात और पश्चिम बंगाल की मंडियों में भी प्याज की कीमतों में बड़ा अंतर देखा गया। कहीं न्यूनतम भाव 575 रुपये रहा तो कहीं अधिकतम दर 1800 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंची। लेकिन औसतन कीमतें किसानों की उम्मीदों से काफी नीचे रहीं।

प्याज किसानों की मांग है कि सरकार इस गिरावट को गंभीरता से ले और प्याज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की घोषणा करे। साथ ही, मंडियों में दामों की गारंटी सुनिश्चित करने की भी आवश्यकता है ताकि किसानों को लागत से नीचे कीमत पर फसल बेचने को मजबूर न होना पड़े। फिलहाल देश के कई हिस्सों में प्याज की खेती करने वाले लाखों किसान आर्थिक संकट में हैं और उन्हें सरकारी हस्तक्षेप की सख्त जरूरत महसूस हो रही है।

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