लखनऊ: बरसात का मौसम हरियाली, ठंडक और सुकून का एहसास तो लाता है, लेकिन यह मौसम पशुपालकों के लिए कई तरह की चुनौतियों का कारण भी बन जाता है। खेत-खलिहानों में चारों ओर हरी-भरी घास उगने लगती है, जिसे किसान चारे के रूप में अपने मवेशियों को खिलाते हैं। लेकिन विशेषज्ञों की मानें तो बरसात में उगी हर घास पशुओं के लिए लाभकारी नहीं होती। कई बार यही हरी घास उनके लिए गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है।
बारिश में न खिलाएं तराई वाले इलाकों की घास
पशु चिकित्सकों के मुताबिक, तराई या दलदली इलाकों में उगी घास जानवरों के लिए नुकसानदेह हो सकती है। इन जगहों पर पानी जमा होने से हानिकारक कीड़े-पतंगे और बैक्टीरिया पनप जाते हैं, जो घास की सतह पर चिपक जाते हैं। यदि किसान ऐसी घास को काटकर अपने मवेशियों को खिला देते हैं, तो इससे पेट संबंधी संक्रमण, अपच और अन्य बीमारियां होने की संभावना बढ़ जाती है।
नमी वाला या गीला चारा हो सकता है जानलेवा
पशुपालकों को बरसात के दिनों में गीला या नमीयुक्त चारा बिल्कुल नहीं खिलाना चाहिए। चारे में मौजूद नमी के कारण उसमें फंगल इंफेक्शन या अन्य हानिकारक सूक्ष्मजीव जल्दी पनपते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि नमी से भरे चारे का सेवन पशुओं को बीमार बना सकता है, खासकर उनके पाचन तंत्र पर असर डाल सकता है। ऐसे में चारे को धूप में अच्छी तरह सुखाकर ही मवेशियों को देना चाहिए।
बरसात का पहला पानी पशुओं पर न पड़ने दें
पशु विशेषज्ञों की राय है कि बरसात का पहला पानी मवेशियों के शरीर पर नहीं पड़ना चाहिए, क्योंकि इससे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो सकती है। अक्सर देखा गया है कि पहले पानी में मौजूद रासायनिक तत्व और वातावरणीय अशुद्धियां पशुओं को जल्दी बीमार बना देती हैं। साथ ही कोशिश करनी चाहिए कि खेतों या सड़कों के किनारे की घास पशुओं को न दी जाए, क्योंकि ये क्षेत्र कीटाणुओं से अधिक संक्रमित होते हैं।
बरसात में कौन सा चारा है सुरक्षित?
बारिश के मौसम में पशुओं के लिए नेपियर घास, मक्का या अन्य हरी चारे वाली फसलें सबसे सुरक्षित मानी जाती हैं। ये घासें तेजी से बढ़ती हैं और इनमें कीटाणुओं के पनपने की संभावना भी कम होती है। इसके अलावा ऊंचे, सूखे स्थानों की घास भी मवेशियों के लिए लाभकारी होती है। पशु चिकित्सकों की सलाह है कि बरसात के मौसम में पशुओं का टीकाकरण भी जरूर करवाना चाहिए, ताकि किसी भी संक्रमण से उनकी रक्षा हो सके।
पशुपालकों के लिए सावधानी ही सुरक्षा
बरसात का मौसम जहां प्राकृतिक चारे की उपलब्धता बढ़ा देता है, वहीं यह मवेशियों के लिए खतरे का संकेत भी हो सकता है, अगर सावधानी नहीं बरती गई तो। इसलिए पशुपालकों को चाहिए कि वे हर घास को चारा न मानें, और अपने पशुओं के आहार को लेकर पूरी सतर्कता बरतें। साफ, सूखा और पोषणयुक्त चारा ही मवेशियों के स्वास्थ्य और उत्पादकता को बनाए रख सकता है।
