नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने कृषि श्रमिकों के हित में एक बड़ा और ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए न्यूनतम मजदूरी की दरों में व्यापक संशोधन किया है। अब राज्य के सभी जिलों में कृषि कार्यों में लगे वयस्क श्रमिकों को न्यूनतम 252 रुपए प्रतिदिन या 6552 रुपए प्रतिमाह मजदूरी मिलनी तय की गई है। इस फैसले से प्रदेश भर के लाखों खेतिहर मजदूरों, पशुपालन, मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन और कुक्कुट पालन जैसे कृषि आधारित कार्यों में लगे लोगों को आर्थिक सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिलेगा। यह संशोधित मजदूरी दर पारंपरिक कृषि कार्यों के साथ-साथ उन सभी कृषि गतिविधियों पर लागू होगी जिनमें शारीरिक श्रम की जरूरत होती है, जैसे फसल बोने, काटने, ढोने, मंडी तक पहुंचाने आदि। इसके अलावा पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, मधुमक्खी पालन, कुक्कुट पालन और अन्य सहायक कृषि उद्योग भी इस दायरे में लाए गए हैं।
सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि मजदूरी का भुगतान नकद, आंशिक नकद, कृषि उपज या डिजिटल माध्यमों से किया जा सकता है। मगर किसी भी स्थिति में श्रमिक को मिलने वाली कुल मजदूरी निर्धारित न्यूनतम दर से कम नहीं होनी चाहिए। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल लेन-देन को प्रोत्साहन मिलेगा और भुगतान प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी। नए नियमों के अनुसार, प्रति घंटे मजदूरी की दर भी दैनिक मजदूरी का छठा हिस्सा तय की गई है, जिससे आंशिक रूप से या कुछ घंटों के लिए काम करने वाले श्रमिकों के हितों की भी रक्षा की जा सकेगी। यदि कोई श्रमिक पहले से इस तय दर से अधिक मजदूरी पा रहा है, तो उसे वही दर मिलती रहेगी और उसे ही न्यूनतम मानक माना जाएगा। यह फैसला केवल मजदूरी तय करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रदेश की श्रमिक नीति में एक गहरा और सकारात्मक बदलाव दर्शाता है। इससे न केवल खेतिहर मजदूरों की आमदनी में बढ़ोतरी होगी, बल्कि कृषि क्षेत्र में श्रम की गुणवत्ता और निरंतरता भी सुनिश्चित होगी। इससे किसानों को कुशल और स्थायी श्रमिक मिलेंगे, जिससे उत्पादन पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा।
सरकार का यह कदम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उस नीति को और मजबूती देता है जिसमें श्रमिकों के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। इससे पहले सरकार ई-श्रम पोर्टल के माध्यम से असंगठित क्षेत्र के करोड़ों श्रमिकों को सरकारी योजनाओं से जोड़ चुकी है। अब न्यूनतम मजदूरी की नई अधिसूचना उस नीति की एक और मजबूत कड़ी बनकर सामने आई है। यह निर्णय केवल मजदूरों के लिए राहत नहीं है, बल्कि यह उत्तर प्रदेश को एक ऐसे राज्य की पहचान दिलाता है जहां कृषि उत्पादन के साथ-साथ श्रमिक कल्याण को भी केंद्र में रखा गया है। डिजिटल भुगतान की व्यवस्था और न्यूनतम वेतन की सुनिश्चितता से यह भी साबित होता है कि राज्य सरकार आधुनिक, पारदर्शी और जनकल्याणकारी शासन के मॉडल की ओर बढ़ रही है।
