कृषि समाचार

मिट्टी की जांच के लिए जल्द आएगा नया ऐप: शिवराज सिंह चौहान

app for soil health

रेवाड़ी: केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों के हित में एक बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि केंद्र सरकार जल्द ही ऐसा मोबाइल ऐप उपलब्ध कराएगी, जिसकी सहायता से किसान अपने खेत की मिट्टी की स्थिति का आसानी से पता लगा सकेंगे। इस तकनीक के माध्यम से किसानों को यह जानकारी मिलेगी कि उनकी भूमि में कौन-कौन से पोषक तत्व उपलब्ध हैं और बेहतर उत्पादन के लिए कितनी मात्रा में उर्वरक का प्रयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने किसानों से संतुलित उर्वरक उपयोग और प्राकृतिक खेती अपनाने का भी आह्वान किया।

मिट्टी की स्थिति बताएगा नया दूरभाष अनुप्रयोग

हरियाणा के रेवाड़ी जिले के बावल में आयोजित ‘खेत बचाओ अभियान’ के समापन समारोह को संबोधित करते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि जल्द ही किसान अपने दूरभाष में एक विशेष अनुप्रयोग स्थापित कर सकेंगे। खेत में खड़े होकर ही किसान अपनी भूमि की स्थिति की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे और यह भी जान पाएंगे कि किस उर्वरक की कितनी आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक खेती की ओर प्रेरित करना है ताकि अनावश्यक उर्वरक उपयोग से बचा जा सके और खेती की लागत भी कम हो। मंत्री ने कहा कि वर्तमान में किसानों को संबंधित राज्य सरकारों द्वारा मिट्टी स्वास्थ्य पत्र उपलब्ध कराया जाता है, जिसमें भूमि की गुणवत्ता से जुड़ी जानकारी दर्ज होती है। सरकारी आँकड़ों के अनुसार मार्च 2026 तक देशभर में लगभग 26 करोड़ मिट्टी स्वास्थ्य पत्र जारी किए जा चुके हैं।

अंधाधुंध उर्वरक और कीटनाशक उपयोग पर जताई चिंता

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यूरिया और अन्य रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता लगातार प्रभावित हो रही है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे बिना आवश्यकता के उर्वरकों का प्रयोग न करें और वैज्ञानिक सलाह के अनुसार ही उनका उपयोग करें। उन्होंने यह भी कहा कि उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से भूमि की उर्वरता धीरे-धीरे घट रही है, जिसका प्रभाव भविष्य की कृषि पर पड़ सकता है। इसलिए किसानों को संतुलित खेती के साथ-साथ प्राकृतिक खेती की ओर भी कदम बढ़ाना चाहिए।

प्राकृतिक खेती को बताया भविष्य का मार्ग

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यदि प्राकृतिक खेती वैज्ञानिक तरीके से की जाए तो उत्पादन में कोई कमी नहीं आती। उन्होंने किसानों से रासायनिक खेती पर निर्भरता धीरे-धीरे कम करने और प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित खेती को अपनाने का आग्रह किया। उनका कहना था कि इससे भूमि की गुणवत्ता लंबे समय तक सुरक्षित रहेगी और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।

हरियाणा के किसानों की उपलब्धियों की सराहना

अपने संबोधन में केंद्रीय कृषि मंत्री ने हरियाणा के किसानों की मेहनत और योगदान की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि राज्य में 24 फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ दिया जा रहा है। साथ ही ‘भावांतर भरपाई योजना’ के माध्यम से बागवानी फसलों के उत्पादकों को उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब देश को विदेशों से गेहूं मंगाना पड़ता था, लेकिन आज हरियाणा सहित देश के किसानों की मेहनत से भारत का अन्न भंडार भर चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि धान उत्पादन के मामले में भारत विश्व में प्रथम स्थान पर पहुंच चुका है और इस उपलब्धि में हरियाणा के किसानों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। कार्यक्रम में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी उपस्थित रहे और उन्होंने किसानों को टिकाऊ तथा आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।

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