अहमदाबाद: गुजरात समेत देशभर की विभिन्न मंडियों में इन दिनों आलू के भाव में तेज गिरावट दर्ज की जा रही है, जिससे किसानों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। अचानक दाम गिरने से किसानों की लागत तक नहीं निकल पा रही है। गुजरात के बनासकांठा जिले में किसानों को मात्र 4 से 5 रुपये प्रति किलो तक भाव मिल रहा है, जो उत्पादन लागत के आधे से भी कम बताया जा रहा है। किसानों का कहना है कि आलू की खेती में बीज, खाद, दवा, सिंचाई, मजदूरी और परिवहन पर भारी खर्च आता है। इसके बावजूद मंडियों में बेहद कम कीमत मिलने से उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
फसल खेत में छोड़ने को मजबूर किसान
कम दाम मिलने के कारण कई किसान आलू की खुदाई तक नहीं कर पा रहे हैं। उनका कहना है कि कटाई और बाजार तक पहुंचाने का खर्च भी निकलना मुश्किल हो गया है। कई क्षेत्रों में किसान आलू की फसल खेत में ही छोड़ने को मजबूर हैं। इससे कर्ज का बोझ और बढ़ने की आशंका है।
गुजरात की प्रमुख मंडियों में 21 फरवरी के भाव
21 फरवरी को विभिन्न मंडियों में दर्ज कीमतों के अनुसार हालात चिंताजनक बने हुए हैं।
- आणंद एपीएमसी में आलू ग्रेड ए का न्यूनतम भाव 500 रुपये और अधिकतम 750 रुपये प्रति क्विंटल रहा, जबकि औसत 625 रुपये दर्ज किया गया।
- डीसा एपीएमसी, बनासकांठा में आलू एफएक्यू का न्यूनतम भाव 285 रुपये और अधिकतम 655 रुपये प्रति क्विंटल रहा।
- अंकलेश्वर एपीएमसी, भरूच में आलू ग्रेड ए का औसत भाव 1100 रुपये रहा।
- दाहोद सब्जी मंडी में आलू लोकल 700 से 1000 रुपये प्रति क्विंटल के बीच बिका।
- भुज एपीएमसी, कच्छ में देसी आलू 900 से 1200 रुपये प्रति क्विंटल रहा।
- कपडवंज एपीएमसी, खेड़ा में आलू मीडियम का औसत 600 रुपये दर्ज किया गया।
- नडियाद एपीएमसी में आलू एफएक्यू का औसत 1600 रुपये प्रति क्विंटल रहा, जबकि चकलासी और पिपलाग केंद्रों पर भी 1200 से 1300 रुपये प्रति क्विंटल के बीच भाव दर्ज किए गए।
- मेहसाणा और विजापुर वेज एपीएमसी में भी भाव 200 से 800 रुपये प्रति क्विंटल के बीच रहे।
- बिलिमोरा और नवसारी एपीएमसी में 1000 से 1200 रुपये प्रति क्विंटल तक भाव मिले।
- पोरबंदर एपीएमसी में रेड नैनिटल आलू 1000 से 1500 रुपये प्रति क्विंटल तक बिका।
न्यूनतम समर्थन मूल्य की मांग
किसानों ने सरकार से आलू के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने और बाजार में स्थिरता लाने के लिए हस्तक्षेप की मांग की है। साथ ही भंडारण और प्रसंस्करण की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य मिल सके। किसानों का कहना है कि यदि शीघ्र प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। कृषि विशेषज्ञों का भी मानना है कि उत्पादन लागत और बाजार मूल्य के बीच बढ़ती खाई को कम करने के लिए नीतिगत हस्तक्षेप जरूरी है।
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