मंडी भाव

मक्‍का किसानों को नहीं मिल रहा एमएसपी, लगातार गिर रहे हैं भाव

Maize farmers

नई दिल्ली: देशभर में मक्‍का किसानों के लिए मौजूदा विपणन सत्र काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। बीते खरीफ मौसम में बड़ी संख्या में किसानों ने सोयाबीन और कपास जैसी फसलों से दूरी बनाकर मक्‍का की खेती अपनाई थी। किसानों को उम्मीद थी कि उन्हें 2400 रुपये प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ मिलेगा और पिछला नुकसान पूरा हो सकेगा, लेकिन वास्तविक स्थिति ने उनकी उम्मीदों को झटका दिया है। रबी मौसम में भी मक्‍का की बुवाई में हल्की बढ़ोतरी हुई, परंतु उचित दाम न मिलने से किसान निराश हैं।

लगातार गिरते दाम से बढ़ी किसानों की चिंता

सरकारी पोर्टल एगमार्कनेट के अनुसार अप्रैल 2026 में मक्‍का के मंडी भाव में गिरावट का रुझान सामने आया है। रिपोर्ट बताती है कि मक्‍का का औसत थोक भाव लगभग 1797 रुपये प्रति क्विंटल रह गया है, जो घोषित समर्थन मूल्य से 603 रुपये कम है। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में कीमतें 1600 से 1650 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास बनी हुई हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। मार्च 2026 में भी हालात बहुत बेहतर नहीं थे, जब औसत कीमत करीब 1892 रुपये प्रति क्विंटल थी। यानी एक महीने के भीतर ही कीमतों में और गिरावट दर्ज की गई है, जो बाजार में लगातार दबाव को दर्शाती है।

कई महीनों से जारी है गिरावट का सिलसिला

अगर पिछले महीनों के रुझान पर नजर डालें तो नवंबर 2025 में मक्‍का का औसत भाव करीब 2150 रुपये था, जो दिसंबर में बढ़कर 2175 रुपये तक पहुंचा। इसके बाद जनवरी में गिरकर 1999 रुपये और फरवरी में 1990 रुपये रह गया। मार्च और अप्रैल में यह गिरावट और गहरी हो गई। इस पूरे समय में एक भी ऐसा महीना नहीं रहा जब बाजार भाव 2400 रुपये के समर्थन मूल्य के करीब पहुंचा हो। इससे स्पष्ट है कि किसानों को घोषित मूल्य का वास्तविक लाभ नहीं मिल पा रहा है।

लागत के आसपास पहुंचा बाजार भाव

कृषि लागत एवं मूल्य आयोग के अनुसार मक्‍का की लागत लगभग 1508 रुपये प्रति क्विंटल आंकी गई है। समर्थन मूल्य तय करते समय करीब 59 प्रतिशत लाभ देने का दावा किया गया था, लेकिन वर्तमान बाजार भाव 1700 से 1800 रुपये के बीच रहने से किसानों की आय पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।

अन्य फसलों में तेजी से मिला आंशिक राहत

बीते खरीफ मौसम में किसानों ने सोयाबीन और कपास से नुकसान से बचने के लिए मक्‍का को चुना था, लेकिन यह निर्णय भी अपेक्षित राहत नहीं दे सका। इस बीच इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के असर से कपास और सोयाबीन के दामों में तेजी आई है और कीमतें समर्थन मूल्य से ऊपर पहुंच गई हैं, जिससे इन फसलों के किसानों को कुछ राहत मिली है। वहीं मक्‍का उत्पादक किसान लगातार नुकसान का सामना कर रहे हैं और कई महीनों से समर्थन मूल्य का लाभ नहीं देख पा रहे हैं।

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