गांधीनगर: देश में दलहन उत्पादन को लेकर नए सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। ताजा आंकड़ों के मुताबिक चना उत्पादन में गुजरात नंबर वन है, जबकि तूर उत्पादन में भी राज्य लगातार मजबूत स्थिति बनाए हुए है। विश्व दलहन दिवस के अवसर पर गुजरात सरकार की ओर से जारी बयान में बताया गया कि राज्य ने बीते कुछ वर्षों में दलहन खेती को योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया है, जिसका सीधा लाभ किसानों को मिल रहा है। केंद्र सरकार की दलहन आत्मनिर्भरता मिशन योजना के तहत राज्यों में उत्पादकता बढ़ाने, बेहतर बीज उपलब्ध कराने और किसानों को तकनीकी सहायता देने पर जोर दिया जा रहा है। गुजरात में इन प्रयासों का असर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।
चना और तूर दोनों की उत्पादकता में बढ़ोतरी
राज्य में वर्ष 2021-22 से 2023-24 के बीच चना और तूर दोनों फसलों की उत्पादकता में उल्लेखनीय सुधार दर्ज हुआ है। इस अवधि में तूर की औसत उत्पादकता करीब 1199 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रही। वहीं चना की औसत उत्पादकता बढ़कर 1795 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तक पहुंच गई। अकेले 2023-24 में गुजरात ने चना उत्पादकता में 1714 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर का आंकड़ा छूकर देश में पहला स्थान हासिल किया।
तीन गुना तक बढ़ा दलहन उत्पादन
दलहन क्षेत्र में तेजी का मुख्य कारण खेती के रकबे और उत्पादन दोनों का विस्तार है। वर्ष 2018-19 में राज्य में दलहन का कुल रकबा करीब 6.62 लाख हेक्टेयर था, जो 2023-24 में बढ़कर 10.89 लाख हेक्टेयर हो गया। इसी अवधि में दलहन उत्पादन भी लगभग तीन गुना बढ़कर 6.79 लाख टन से 15.51 लाख टन तक पहुंच गया।
चना की खेती में सबसे तेज उछाल देखा गया है। 2018-19 में चना का रकबा करीब 1.73 लाख हेक्टेयर था, जो 2023-24 में बढ़कर 6.22 लाख हेक्टेयर हो गया। उत्पादन भी 2.35 लाख टन से बढ़कर 10.66 लाख टन तक पहुंच गया।
इन दलहन फसलों की होती है खेती
गुजरात में चना, मूंग, उड़द, मोठ, तूर और मटर जैसी प्रमुख दलहनी फसलें उगाई जाती हैं। राज्य ने निर्यात के मोर्चे पर भी अपनी मौजूदगी मजबूत की है। अप्रैल से नवंबर 2025-26 के बीच गुजरात से करीब 74,652 टन दलहन का निर्यात हुआ, जिसकी कीमत लगभग 69.98 मिलियन डॉलर आंकी गई।
सरकार की योजनाओं से मिला लाभ
राज्य सरकार के अनुसार, उत्पादकता बढ़ाने के लिए प्रमाणित बीज वितरण, सब्सिडी पर प्रदर्शन प्लॉट और किसानों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सीड रिप्लेसमेंट रेट योजना के जरिए बेहतर गुणवत्ता वाले बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है।
आधुनिक तकनीक से बदली तस्वीर
किसानों द्वारा ड्रोन से कीटनाशक और उर्वरक छिड़काव, बेहतर हाइब्रिड बीज, उन्नत बीज उपचार और मशीनीकरण अपनाने से लागत घटी है और पैदावार बढ़ी है। ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों से पानी की बचत के साथ बेहतर उत्पादन सुनिश्चित हुआ है। फसल चक्र, अंतरवर्तीय खेती, जैविक खाद और प्राकृतिक खेती जैसे तरीकों ने भी दलहन उत्पादन को नई दिशा दी है। यही वजह है कि गुजरात अब दलहन क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है और आने वाले वर्षों में इसका असर राष्ट्रीय उत्पादन संतुलन पर भी दिखाई देगा।
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