कृषि समाचार

नकली कीटनाशकों का जाल, किसानों की जान और फसल दोनों खतरे में

pesticide market fraud India

जयपुर: देश में कीटनाशक बाजार का एक बड़ा हिस्सा नकली और घटिया उत्पादों के कब्जे में है, जिससे किसानों की जान और फसल दोनों पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। ताजा मामला राजस्थान का है, जहां विधानसभा में सरकार ने स्वीकार किया है कि पिछले दो वर्षों में नकली कीटनाशकों के कारण 535 किसानों की मौत हुई है। यह स्थिति न केवल कृषि उत्पादन बल्कि खाद्य सुरक्षा और निर्यात पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

नकली कीटनाशकों का बढ़ता खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार बाजार में करीब 30 प्रतिशत कीटनाशक घटिया या नकली हैं। इनमें प्रतिबंधित रसायन भी शामिल हैं, जो खुलेआम बिक रहे हैं। किसान असली और नकली उत्पाद में अंतर नहीं कर पाते और सस्ते के लालच में जानलेवा उत्पाद खरीद लेते हैं। राज्य में हाल ही में कई फैक्ट्रियों पर छापेमारी के दौरान यह सामने आया कि पत्थर का चूरा, मार्बल की धूल और खतरनाक रसायनों को मिलाकर नकली कीटनाशक और उर्वरक तैयार किए जा रहे थे।

प्रतिबंध के बावजूद कैसे बिक रहे जहरीले रसायन

सरकार ने पहले भी कई खतरनाक कीटनाशकों पर प्रतिबंध लगाया है और समय-समय पर उनकी समीक्षा की जाती रही है। कई रसायनों को पूरी तरह बंद किया गया है, जबकि कुछ को चरणबद्ध तरीके से हटाया गया है। इसके बावजूद नकली उत्पादों का कारोबार लगातार जारी है, जो निगरानी व्यवस्था की कमजोरी को दर्शाता है।

बायोपेस्टिसाइड पर जोर, लेकिन चुनौतियां बरकरार

सरकार अब जैविक कीटनाशकों को बढ़ावा देने की बात कर रही है, जिन्हें सुरक्षित माना जाता है। लेकिन जमीनी स्तर पर किसानों तक इसकी पहुंच सीमित है और नकली उत्पादों का नेटवर्क ज्यादा सक्रिय दिखाई देता है।

नया कानून, लेकिन सवाल कई

सरकार की ओर से नया कीटनाशक प्रबंधन विधेयक लाने की तैयारी की जा रही है, जो पुराने कानून की जगह लेगा। इसमें रसायनों के जोखिम, पर्यावरण और स्वास्थ्य पर प्रभाव को ध्यान में रखते हुए सख्त प्रावधान शामिल किए गए हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रस्तावित कानून में कई कमियां हैं। इसमें पीड़ित किसानों के लिए राहत व्यवस्था, निगरानी प्रणाली और स्पष्ट परिभाषाओं की कमी है, जिससे इसके प्रभावी क्रियान्वयन पर सवाल उठ रहे हैं।

राज्यों के अधिकार सीमित, निगरानी कमजोर

विशेषज्ञों का मानना है कि राज्यों को अधिक अधिकार दिए जाने चाहिए, ताकि वे खतरनाक कीटनाशकों पर तुरंत प्रभावी रोक लगा सकें। वर्तमान प्रावधानों के अनुसार राज्यों की शक्ति सीमित है, जिससे कार्रवाई में देरी हो सकती है। नकली कीटनाशकों का यह बढ़ता संकट किसानों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। जब तक सख्त निगरानी, पारदर्शी व्यवस्था और मजबूत कानून लागू नहीं होते, तब तक इस समस्या का समाधान मुश्किल नजर आता है।

ये भी पढ़ें: ब्रिक्स कृषि बैठक इंदौर में, खाद्य सुरक्षा और किसानों पर फोकस

Related posts

Leave a Comment