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गेहूं का माहों रोग: समय पर पहचान और इलाज से बच सकती है फसल

wheat mahon disease

नई दिल्ली: गेहूं रबी मौसम की सबसे महत्वपूर्ण फसलों में से एक है, जिससे किसान अच्छी पैदावार और आय की उम्मीद करते हैं। इसके लिए किसान समय पर बुवाई, सिंचाई और खाद प्रबंधन पर पूरा ध्यान देते हैं, लेकिन कई बार शुरुआती अवस्था में लगने वाले रोग सारी मेहनत पर पानी फेर देते हैं। इन्हीं खतरनाक रोगों में से एक है जड़ का माहों रोग, जो गेहूं की बुवाई के लगभग 20 से 25 दिन बाद दिखाई देने लगता है और समय पर नियंत्रण न हो तो गेहूं का माहों रोग पूरी फसल को भारी नुकसान पहुंचा सकता है।

क्या है जड़ का माहों रोग

जड़ का माहों रोग एक कीट जनित समस्या है। इसमें बहुत छोटे-छोटे माहों कीट गेहूं के पौधों की जड़ों से चिपक जाते हैं और उनका रस चूसने लगते हैं। रस चूसने से पौधे कमजोर हो जाते हैं और उनकी बढ़वार रुक जाती है। शुरुआत में किसान इसे सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन धीरे-धीरे यही रोग पूरे खेत में फैलने लगता है और फसल को गंभीर नुकसान पहुंचाता है।

जड़ का माहों रोग की पहचान कैसे करें

इस रोग की पहचान अपेक्षाकृत आसान है। खेत में कुछ जगहों पर गोल-गोल घेरों में पौधे पीले या सफेद पड़ने लगते हैं। कुछ समय बाद ये पौधे पूरी तरह सूख जाते हैं। जब किसान ऐसे पौधों को उखाड़कर देखते हैं, तो जड़ें कमजोर और क्षतिग्रस्त दिखाई देती हैं। जड़ों पर हरे रंग की जूं जैसे बहुत छोटे कीट नजर आते हैं, जिन्हें माहों कीट कहा जाता है।

गेहूं की फसल को क्या नुकसान होता है

माहों कीट जब जड़ों से लगातार रस चूसते रहते हैं, तो पौधे की बढ़त पूरी तरह रुक जाती है। जड़ कमजोर होने से पौधा आसानी से जमीन से उखड़ने लगता है। यदि समय पर उपचार न किया जाए, तो यह कीट तेजी से फैलता है और खेत का बड़ा हिस्सा खराब हो सकता है। इसका सीधा असर गेहूं की पैदावार पर पड़ता है और किसान की आमदनी में भारी गिरावट आ सकती है।

गेहूं में कब लगता है माहों रोग

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार गेहूं में कुछ रोग शुरुआती अवस्था में आते हैं और कुछ बाद के चरण में। जड़ का माहों रोग आमतौर पर बुवाई के 20 से 30 दिन बाद दिखाई देता है। इसी समय कई बार दीमक का प्रकोप भी देखने को मिलता है, जिससे किसानों को पहचान करने में भ्रम हो सकता है।

जड़ का माहों रोग और दीमक में अंतर

जड़ का माहों रोग और दीमक से होने वाले नुकसान में अंतर करना किसानों के लिए थोड़ा मुश्किल होता है, क्योंकि दोनों ही जड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं। हालांकि राहत की बात यह है कि दोनों समस्याओं के नियंत्रण के लिए इस्तेमाल की जाने वाली दवा एक ही है। इससे किसानों को अलग-अलग कीटनाशक खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती और लागत भी कम होती है।

जड़ का माहों रोग का सही इलाज

अगर खेत में जड़ का माहों रोग के लक्षण दिखाई दें, तो किसानों को बिना देर किए उपचार करना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार इस रोग के नियंत्रण के लिए क्लोरोपायरीफॉस दवा प्रभावी मानी जाती है। इसकी अनुशंसित मात्रा 1 लीटर प्रति एकड़ है, जिसे सिंचाई के पानी के साथ मिलाकर खेत में देना चाहिए। इस तरीके से दवा सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचती है और माहों कीट नष्ट हो जाते हैं।

समय पर उपचार से बच सकती है फसल

जड़ का माहों रोग गेहूं की फसल के लिए बेहद नुकसानदायक है, लेकिन सही समय पर पहचान और उचित दवा के इस्तेमाल से इससे आसानी से बचा जा सकता है। थोड़ी सी सतर्कता और वैज्ञानिक सलाह अपनाकर किसान अपनी मेहनत, लागत और गेहूं की पैदावार तीनों को सुरक्षित रख सकते हैं।

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