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गेहूं में खरपतवार और करनाल बंट से बढ़ा खतरा, समय पर नियंत्रण जरूरी

weeds in wheat

लखनऊ: रबी सीजन में गेहूं में खरपतवार उग आते हैं, जो पैदावार में उल्लेखनीय गिरावट का कारण बनते हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार गोयला, चील, प्याजी, मोरवा, गुल्ली डंडा, बथुआ, अकरी, वनबट्टी, कृष्णनील और जंगली जई जैसे खरपतवार पोषक तत्वों, नमी और स्थान के लिए मुख्य फसल से प्रतिस्पर्धा करते हैं। इससे उत्पादन क्षमता प्रभावित होती है और किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।

खरपतवार नियंत्रण क्यों जरूरी

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय पर खरपतवार नियंत्रण नहीं किया गया तो गेहूं की पैदावार 20 से 40 प्रतिशत तक घट सकती है। अधिक उत्पादन के लिए शुरुआती अवस्था में ही नियंत्रण जरूरी है। खरपतवार नियंत्रण के लिए किसान पेंडीमिथेलीन, सल्फोसल्फूरान, मेट्रीब्यूजिन, 2,4 डी, आइसोप्रोफ्यूरान, क्लोडीनोफॉप, मेटासल्फूरान, मिसोसल्फूरान और आइडोसल्फूरान जैसे खरपतवारनाशी का वैज्ञानिक सलाह के अनुसार छिड़काव कर सकते हैं। दवा का प्रयोग निर्धारित मात्रा और उचित समय पर करना आवश्यक है।

कीट और रोग भी बन रहे चुनौती

खरपतवारों के अलावा कई कीट और रोग भी गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचाते हैं। इनमें सबसे खतरनाक रोग करनाल बंट को माना जाता है, जिसे गेहूं का कैंसर भी कहा जाता है। यह रोग बीज, मिट्टी और हवा के माध्यम से फैलता है और क्वारंटाइन के तहत प्रतिबंधित श्रेणी में आता है।

करनाल बंट के लक्षण

इस रोग के लक्षण सामान्यतः फूल आने की अवस्था में दिखाई देते हैं। दाने के चारों ओर काला पाउडर जमा हो जाता है और दानों से एक विशेष प्रकार की दुर्गंध आती है। यह गंध ट्राइमिथाइलेमाइन के कारण होती है।

करनाल बंट का नियंत्रण

विशेषज्ञों के अनुसार करनाल बंट से बचाव के लिए प्रतिरोधी किस्मों का चयन करें और बुवाई से पहले बीज उपचार अवश्य करें। फूल आने की अवस्था में सिंचाई से बचें। रासायनिक नियंत्रण के तहत बाविस्टिन 1000 ग्राम प्रति हेक्टेयर तथा प्रोकोनोजोल 500 ग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग किया जा सकता है। एग्रोसान-जी.एन. (पी.एम.ए.) 2.5 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचार भी प्रभावी माना गया है।

लूज स्मट रोग से सावधान

लूज स्मट रोग, जिसे अनावृत कंडवा भी कहा जाता है, लगने पर बालियों में काला पाउडर दिखाई देता है। तना और पत्तियों पर इसके लक्षण सामान्यतः नहीं दिखते। संक्रमित बालियों के अंडाशयों में काला चूर्ण बनता है, जिसे स्पुर कहा जाता है।

लूज स्मट का नियंत्रण

रोगग्रस्त पौधों को तुरंत खेत से बाहर निकालकर नष्ट कर दें। सोलर उपचार विधि अपनाकर बीजों को संक्रमण मुक्त बनाया जा सकता है। गर्म जल उपचार के तहत 54 डिग्री तापमान पर बीजों को 30 मिनट तक उपचारित करना लाभकारी है। रासायनिक नियंत्रण के लिए बुवाई से पहले वीटा वेक्स 2.5 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से बीजोपचार करने की सलाह दी गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर खरपतवार और रोग नियंत्रण से गेहूं की फसल को सुरक्षित रखते हुए अधिक पैदावार प्राप्त की जा सकती है।

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