नई दिल्ली: भारत मौसम विज्ञान विभाग ने मौजूदा मौसम की परिस्थितियों को देखते हुए किसानों के लिए नई कृषि सलाह जारी की है। विभाग ने बिहार और झारखंड के विभिन्न कृषि क्षेत्रों के लिए फसलवार सुझाव दिए हैं। साथ ही मानसून की प्रगति, भारी वर्षा, लू और अन्य मौसम संबंधी परिस्थितियों को लेकर भी चेतावनी जारी की गई है, ताकि किसान समय रहते आवश्यक कृषि कार्यों की योजना बना सकें।
बिहार के किसानों को फसलवार सलाह
मौसम विभाग के अनुसार उत्तर-पूर्वी जलोढ़ क्षेत्र में सुबह के समय पकी हुई मक्का और लीची की कटाई करना उपयुक्त रहेगा। किसानों को धान की नर्सरी तैयार करने से पहले खेत की अच्छी तरह जुताई करने और सड़ी हुई गोबर की खाद का प्रयोग करने की सलाह दी गई है। बुवाई से पहले बीजों का उपचार करने पर भी विशेष जोर दिया गया है।
मखाना उत्पादकों को खेत में एक से डेढ़ फुट तक पानी का स्तर बनाए रखने की सलाह दी गई है ताकि बेहतर उत्पादन मिल सके। वहीं मक्का, लोबिया और ज्वार की बुवाई का यह उपयुक्त समय बताया गया है, जिससे वर्षभर पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता बनी रहे।
कद्दू की फसल को फल मक्खी के प्रकोप से बचाने के लिए प्रति हेक्टेयर आठ से दस फेरोमोन फंदे लगाने की सलाह दी गई है।
उत्तर-पश्चिमी जलोढ़ क्षेत्र में किसानों को साफ मौसम के दौरान गर्मी की मूंग की कटाई कर सुरक्षित भंडारण करने को कहा गया है। साथ ही मध्यम अवधि और सुगंधित धान की नर्सरी तैयार करने, हरी खाद वाली फसलों की बुवाई पूरी करने, खरीफ प्याज की नर्सरी तैयार करने तथा खरीफ मक्का की समय पर बुवाई करने की सलाह दी गई है।
दक्षिण बिहार क्षेत्र में मिट्टी में पर्याप्त नमी होने पर खरीफ मक्का की बुवाई शुरू करने की सिफारिश की गई है। लंबी अवधि वाली धान की किस्मों की नर्सरी लगाने तथा खरीफ प्याज की पौध तैयार करने के लिए अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद का उपयोग करने को कहा गया है।
मिर्च की फसल में विषाणु जनित रोगों की संभावना को देखते हुए संक्रमित पौधों को हटाकर मिट्टी में दबाने तथा साफ मौसम में अनुशंसित दवा का छिड़काव करने की सलाह दी गई है।
झारखंड के किसानों के लिए महत्वपूर्ण सुझाव
झारखंड के पश्चिमी पठारी क्षेत्र में किसानों को अरहर की बुवाई के लिए खेत तैयार करने तथा केवल प्रमाणित बीजों का उपयोग करने की सलाह दी गई है। बुवाई से पहले बीज उपचार करने पर भी विशेष जोर दिया गया है।
खरीफ मक्का और धान की नर्सरी के लिए खेत तैयार करने तथा उन्नत किस्मों का चयन करने की सलाह दी गई है। मध्यम और निचले क्षेत्रों में हरी खाद के लिए सनई और ढैंचा की बुवाई करने को कहा गया है।
भिंडी की फसल में पीली शिरा रोग की आशंका को देखते हुए सुबह के समय नीम के तेल का छिड़काव करने अथवा पीले चिपचिपे फंदों का उपयोग करने की सलाह दी गई है।
रागी की खेती के लिए खेत की अच्छी जुताई, पर्याप्त गोबर की खाद का प्रयोग तथा जल निकासी की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।
मानसून की प्रगति और मौसम विभाग का अलर्ट
मौसम विभाग के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून के उत्तर अरब सागर, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के अन्य हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं।
पूर्वोत्तर भारत, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में अगले पांच दिनों तक भारी से बहुत भारी वर्षा होने की संभावना है। वहीं कुछ स्थानों पर अत्यधिक भारी वर्षा भी हो सकती है। इसके अलावा कोंकण-गोवा और मध्य महाराष्ट्र में भी आगामी दिनों में अत्यधिक भारी वर्षा का अनुमान जताया गया है।
लू और भारी वर्षा को लेकर भी चेतावनी
मौसम विभाग ने उत्तर प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में अगले दो दिनों तक लू से भीषण लू चलने की संभावना व्यक्त की है। हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली के कुछ हिस्सों में भी लू की स्थिति बन सकती है। हालांकि दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में वर्षा की गतिविधियां बढ़ने से तापमान में धीरे-धीरे कमी आने की संभावना है।
भारी वर्षा वाले क्षेत्रों में जलभराव, बाढ़ और भूस्खलन की आशंका को देखते हुए लोगों से सतर्क रहने की अपील की गई है। विभाग ने गरज-चमक के दौरान सुरक्षित स्थान पर रहने, लू के समय पर्याप्त पानी पीने तथा मछुआरों को चिन्हित समुद्री क्षेत्रों में अगले कुछ दिनों तक समुद्र में न जाने की सलाह दी है।
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