नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने बेमौसम बारिश से प्रभावित किसानों को राहत देते हुए पंजाब में गेहूं खरीद के नियमों में महत्वपूर्ण छूट देने का फैसला किया है। सरकार के नए आदेश के अनुसार अब 70 प्रतिशत तक चमक खो चुके गेहूं की भी सरकारी खरीद की जाएगी। किसानों से उनकी उपज न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी जाएगी, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान से बचाने में मदद मिलेगी। रबी विपणन सत्र 2026-27 के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,585 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 160 रुपये प्रति क्विंटल अधिक है। इस बढ़ोतरी के साथ-साथ नियमों में दी गई छूट किसानों के लिए राहत भरी खबर मानी जा रही है।
किन शर्तों में मिली राहत
नए नियमों के तहत पंजाब और चंडीगढ़ में गेहूं की चमक कम होने की सीमा को बढ़ाकर 70 प्रतिशत कर दिया गया है। इसके अलावा सिकुड़े और टूटे हुए दानों की सीमा को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया है। हालांकि, खराब और आंशिक रूप से खराब दानों की अधिकतम सीमा 6 प्रतिशत ही रखी गई है। इन बदलावों के चलते अब अधिक मात्रा में प्रभावित गेहूं की खरीद संभव हो सकेगी, जिससे किसानों को अपनी उपज बेचने में आसानी होगी। लंबे समय से किसान इन शर्तों में ढील की मांग कर रहे थे। केंद्र सरकार ने पंजाब के साथ-साथ हरियाणा और राजस्थान में भी गेहूं खरीद के मानकों में इसी तरह की छूट दी है। इन राज्यों में हाल ही में हुई बेमौसम बारिश ने गेहूं और सरसों जैसी फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई थी।
1 अप्रैल से शुरू हुई खरीद में आ रही थी दिक्कत
इन राज्यों में 1 अप्रैल से गेहूं की सरकारी खरीद शुरू हो चुकी है, लेकिन दानों में अधिक नमी के कारण खरीद प्रक्रिया प्रभावित हो रही थी। कई मंडियों में किसानों की उपज खरीदी नहीं जा रही थी, जिससे उन्हें अपनी फसल वापस ले जाने की नौबत आ रही थी। राज्य सरकारों ने इस समस्या को देखते हुए केंद्र से नियमों में छूट देने की मांग की थी। पंजाब, हरियाणा और राजस्थान सरकारों ने पत्र लिखकर इस संबंध में राहत देने की अपील की थी, जिसे केंद्र सरकार ने स्वीकार कर लिया।
जांच के बाद लिया गया फैसला
भारतीय खाद्य निगम की टीम ने पंजाब की विभिन्न मंडियों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया था। टीम में केंद्र और राज्य दोनों के प्रतिनिधि शामिल थे। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि बेमौसम बारिश और खराब मौसम के कारण गेहूं की गुणवत्ता तय मानकों से काफी नीचे चली गई है। इसी रिपोर्ट के आधार पर निगम ने नियमों में छूट देने की सिफारिश की थी, जिसके बाद केंद्र सरकार ने अंतिम निर्णय लेते हुए किसानों को राहत देने की घोषणा की है।
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