लखनऊ: उत्तर प्रदेश में किसानों को समय पर और उचित मूल्य पर गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए सरकार लगातार सक्रिय है। 2017 से शुरू हुई योजनाओं और प्रयासों का असर अब साफ दिखाई दे रहा है। खरीफ सत्र 2025 में प्रदेशभर में उर्वरक बिक्री के आंकड़े पिछले वर्ष की तुलना में काफी अधिक हैं। कृषि विभाग ने सुनिश्चित किया है कि किसी भी किसान को कालाबाजारी, जमाखोरी, ओवररेटिंग या टैगिंग जैसी समस्याओं का सामना न करना पड़े। निर्धारित एमआरपी पर किसानों को उर्वरक मुहैया कराए जा रहे हैं, साथ ही गड़बड़ी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई भी जारी है।
बिक्री में रिकॉर्ड इजाफा
खरीफ सत्र 2025 में 11 अगस्त तक प्रदेश में कुल 39.40 लाख मीट्रिक टन उर्वरक की बिक्री हो चुकी है, जो 2024 के इसी अवधि के मुकाबले लगभग 5.98 लाख मीट्रिक टन अधिक है। पिछले साल यह आंकड़ा 33.42 लाख मीट्रिक टन था।
उर्वरकों के अनुसार बिक्री स्थिति (11 अगस्त तक)
यूरिया: 2025 में 28.98 लाख मीट्रिक टन, 2024 में 24.53 लाख मीट्रिक टन
डीएपी: 2025 में 5.11 लाख मीट्रिक टन, 2024 में 5.02 लाख मीट्रिक टन
एनपीके: 2025 में 2.25 लाख मीट्रिक टन, 2024 में 1.88 लाख मीट्रिक टन
एमओपी: 2025 में 0.43 लाख मीट्रिक टन, 2024 में 0.23 लाख मीट्रिक टन
एसएसपी: 2025 में 2.63 लाख मीट्रिक टन, 2024 में 1.76 लाख मीट्रिक टन
किसानों को पर्याप्त आपूर्ति
प्रदेश में यूरिया, डीएपी, एनपीके, एमओपी और एसएसपी सभी श्रेणियों में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। 2025 में कई उर्वरकों की मांग पिछले वर्ष से अधिक रही, और बिक्री भी उसी अनुपात में बढ़ी है। कृषि विभाग का दावा है कि खरीफ सत्र के बाकी समय में बिक्री के आंकड़े और तेजी से बढ़ेंगे, जिससे किसानों की खेती पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा। यह प्रयास प्रदेश में कृषि उत्पादन बढ़ाने और किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
