पटना: बिहार में धान की रोपनी लगभग पूरी हो चुकी है, लेकिन मॉनसून की बारिश सामान्य से कम रहने के कारण किसानों के सामने खरीफ फसलों की सिंचाई की चुनौती बढ़ गई है। नहर और नलकूप की सुविधा वाले किसान किसी तरह फसलों की सिंचाई कर पा रहे हैं, लेकिन डीजल पंपसेट पर निर्भर किसानों की लागत लगातार बढ़ रही है। ऐसे किसानों को राहत देने के लिए बिहार सरकार ने डीजल अनुदान योजना शुरू की है। सरकार की ओर से अलग-अलग फसलों और सिंचाई की संख्या के आधार पर 750 रुपये से लेकर 2,250 रुपये प्रति एकड़ तक अनुदान देने का प्रावधान किया गया है। इसके लिए किसानों से 17 अगस्त से आवेदन लिए जा रहे हैं।
अलग-अलग फसलों के लिए तय है अनुदान
कृषि विभाग के अनुसार एक एकड़ फसल की एक बार सिंचाई के लिए करीब 10 लीटर डीजल की जरूरत को आधार बनाया गया है। प्रत्येक सिंचाई के लिए 750 रुपये प्रति एकड़ की दर से अनुदान निर्धारित किया गया है।
धान के बिचड़े और जूट के लिए 1500 रुपये
धान के बिचड़े और जूट की फसल के लिए अधिकतम दो सिंचाई पर 1,500 रुपये प्रति एकड़ तक अनुदान दिया जाएगा। वहीं खरीफ धान, मक्का, दलहनी फसल, तिलहनी फसल, मौसमी सब्जियों तथा औषधीय और सुगंधित पौधों की अधिकतम तीन सिंचाई के लिए 2,250 रुपये प्रति एकड़ तक अनुदान मिलेगा।
अधिकतम 8 एकड़ के लिए मिलेगा लाभ
बिहार सरकार ने डीजल अनुदान के लिए किसान के अधिकतम आठ एकड़ खेती के रकबे को निर्धारित किया है। यानी किसान को अधिकतम आठ एकड़ क्षेत्र की सिंचाई के लिए ही योजना का लाभ दिया जाएगा।
रैयत और गैर-रैयत दोनों किसानों को लाभ
खड़ी फसलों की सिंचाई के लिए रैयत और गैर-रैयत दोनों तरह के किसान इस योजना का लाभ ले सकते हैं। रैयत किसानों को आवेदन के दौरान समय-समय पर लगान रसीद अपलोड करनी होगी। दूसरी ओर दूसरे किसान की जमीन पर खेती करने वाले गैर-रैयत किसानों का सत्यापन संबंधित वार्ड सदस्य, वार्ड पार्षद, मुखिया, सरपंच या पंचायत समिति के किसी सदस्य और कृषि समन्वयक के माध्यम से किया जाएगा।
30 अक्टूबर तक खरीदा डीजल मान्य होगा
डीजल अनुदान का लाभ लेने के लिए किसानों को कुछ जरूरी नियमों का पालन करना होगा। सरकार ने सिंचाई के लिए डीजल खरीदने की अंतिम तारीख 30 अक्टूबर निर्धारित की है। इसी अवधि तक खरीदे गए डीजल को अनुदान के लिए मान्य माना जाएगा। किसानों को सिंचाई की जियो टैगिंग वाली तस्वीर भी आवेदन के दौरान अपलोड करनी होगी। कृषि समन्वयक की ओर से यह जांच की जाएगी कि किसान वास्तव में डीजल पंपसेट का इस्तेमाल करके खेत की सिंचाई कर रहा है या नहीं।
डीजल खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान
किसानों को अधिकृत पेट्रोल पंप से ही डीजल खरीदना होगा। डीजल खरीदते समय प्राप्त पावती में किसान के 13 अंकों वाले पंजीकरण क्रमांक के अंतिम 10 अंक दर्ज करना जरूरी होगा।
डीजल की रसीद संभालकर रखना जरूरी
डीजल की रसीद पर किसान का अंगूठे का निशान भी अनिवार्य किया गया है। सत्यापन के समय किसान को डीजल खरीद की पर्ची कृषि समन्वयक को उपलब्ध करानी होगी। राज्य के बाहर स्थित पेट्रोल पंप से खरीदे गए डीजल पर अनुदान नहीं मिलेगा। इसलिए किसानों को डीजल खरीदते समय पेट्रोल पंप और रसीद से जुड़ी सभी जरूरी जानकारी की जांच कर लेनी चाहिए।
एक बार में एक ही सिंचाई के लिए आवेदन
किसान एक समय में केवल एक पटवन के लिए आवेदन कर सकेंगे। इसके बाद अगली सिंचाई के लिए निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अलग आवेदन किया जा सकेगा। यदि आवेदन में किसी छोटी गलती के कारण आवेदन अस्वीकार हो जाता है तो किसान को दोबारा आवेदन करने का अवसर दिया जाएगा। ऐसे में किसानों को आवेदन करते समय अपनी जानकारी, जमीन का विवरण, डीजल की रसीद और सिंचाई से जुड़ी तस्वीरों को सावधानी से दर्ज करना चाहिए।
कम बारिश के बीच किसानों को मिलेगी राहत
बिहार में मॉनसून की बारिश कम रहने के कारण डीजल पंपसेट से सिंचाई करने वाले किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। ऐसे में 750 से 2,250 रुपये प्रति एकड़ तक मिलने वाला डीजल अनुदान किसानों की सिंचाई लागत को कुछ हद तक कम कर सकता है। खासकर उन क्षेत्रों में जहां नहर या नलकूप की सुविधा पर्याप्त नहीं है, वहां यह योजना किसानों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। हालांकि किसानों को अनुदान प्राप्त करने के लिए निर्धारित समय-सीमा, रसीद, सत्यापन और जियो टैगिंग से जुड़े सभी नियमों का पालन करना होगा।
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