खेती-किसानी

धान की सीधी बुआई में सीड-ड्रिल मशीन के उपयोग के हैं ये लाभ

लखनऊ: धान की खेती में इस बार उत्तर भारत के कई इलाकों में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। पारंपरिक रोपाई की जगह अब किसान तेजी से सीड ड्रील मशीन की मदद से सीधी बुआई की ओर बढ़ रहे हैं। इस तकनीक ने खेतों में न केवल मेहनत और समय की बचत की है, बल्कि जल संरक्षण के लिहाज से भी इसे एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। सीड ड्रील मशीन एक आधुनिक कृषि यंत्र है जो बीजों को खेत में एक समान गहराई और दूरी पर बोने में सक्षम है। पहले इसका उपयोग गेहूं और दलहनी फसलों में अधिक होता था, लेकिन अब धान की फसल में भी इसे अपनाया जा रहा है। सीधी बुआई की प्रक्रिया में बीजों को सीधे खेत में बो दिया जाता है, जिससे नर्सरी तैयार करने और रोपाई की आवश्यकता नहीं होती।

किसान इस तकनीक से काफी संतुष्ट नजर आ रहे हैं। खेतों में पानी की खपत में भारी कमी आई है। पारंपरिक पद्धति में जहां खेतों को लगातार पानी से भरा रखना पड़ता था, वहीं अब सीधी बुआई में कम पानी की जरूरत होती है। इसके अलावा श्रमिकों की आवश्यकता भी कम हो गई है, जिससे लागत में कमी आई है। खेत की तैयारी से लेकर बुआई तक का काम अब एक ही मशीन से हो रहा है, जिससे समय और श्रम दोनों की बचत हो रही है। सरकार भी इस नई तकनीक को बढ़ावा देने में जुटी है। कृषि विभाग की ओर से किसानों को सीड ड्रील मशीन पर सब्सिडी दी जा रही है। कृषि विज्ञान केंद्रों में प्रशिक्षण कार्यक्रमों के जरिए किसानों को इसकी उपयोगिता और संचालन की जानकारी दी जा रही है। कई जिलों में प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं, जिनमें बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लेकर तकनीक को अपनाया है।

बकौल एक किसान – पहले एक एकड़ खेत की रोपाई में कई मजदूर लगते थे और समय भी ज्यादा लगता था, लेकिन अब सीड ड्रील मशीन से वह अकेले ही पूरा काम कर लेते हैं। पानी, श्रम और समय तीनों की बचत हो रही है और उत्पादन में भी अंतर दिख रहा है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक जलवायु संकट के समय में बेहद कारगर साबित हो सकती है। खासकर उन इलाकों में जहां जल स्तर गिर रहा है, वहां यह तरीका जल संरक्षण में अहम भूमिका निभा सकता है। साथ ही, यह किसानों की आय को बढ़ाने और खेती को टिकाऊ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम भी है। धान की सीधी बुआई में सीड ड्रील मशीन के उपयोग से भारतीय कृषि प्रणाली में एक सकारात्मक बदलाव की शुरुआत हुई है। यदि इसे व्यापक स्तर पर अपनाया जाए, तो आने वाले वर्षों में यह बदलाव एक स्थायी कृषि क्रांति का आधार बन सकता है।

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