लखनऊ: 15 फरवरी के बाद का समय मछली पालकों के लिए बेहद संवेदनशील माना जाता है। इस दौरान मौसम तेजी से बदलता है। कभी अचानक गर्मी बढ़ जाती है तो कभी ठंडी हवाएं चलने लगती हैं और सर्दी दोबारा लौट आती है। तापमान के इस उतार-चढ़ाव का सीधा असर तालाब के पानी पर पड़ता है, जिससे मछलियों की सेहत और उत्पादन प्रभावित होता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, जब पानी का तापमान तेजी से ऊपर-नीचे होता है तो मछलियां सबसे ज्यादा प्रभावित होती हैं। उन्हें सांस लेने में दिक्कत होने लगती है, बीमारियां बढ़ जाती हैं और ग्रोथ रुक जाती है। कई बार स्थिति इतनी गंभीर हो जाती है कि तालाब में ही मछलियों की मौत होने लगती है।
कम वजन और बीमार मछलियों के कारण बाजार में दाम भी गिर जाते हैं, जिससे मछली पालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। यही वजह है कि फिशरीज एक्सपर्ट बदलते मौसम में तालाब के पानी की नियमित जांच करने की सलाह देते हैं। खासतौर पर सुबह और देर शाम पानी का तापमान मापना जरूरी बताया जाता है।
ऐसे सामान्य करें तालाब का पानी
विशेषज्ञों का कहना है कि तालाब का पानी ठहरा हुआ होता है, इसलिए सर्दी में यह जल्दी ठंडा हो जाता है। खुले तालाबों में तापमान गिरने का असर और अधिक होता है। ठंडे पानी से मछलियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है।
ऐसी स्थिति में छोटे तालाबों में पंप की मदद से भूमिगत जल मिलाया जाता है। जमीन से निकला पानी सामान्य या हल्का गुनगुना होता है, जो ठंडे पानी के साथ मिलकर तापमान संतुलित करने में मदद करता है।
बड़े तालाबों में यह तरीका आसान नहीं होता, इसलिए वहां जाल डालकर पानी में हलचल पैदा की जाती है, जिससे तापमान में आंशिक संतुलन बनाया जा सके।
ऐसे बढ़ाएं मछलियों की ग्रोथ
बदलते मौसम में मछलियों की बेहतर वृद्धि और सुरक्षा के लिए विशेषज्ञ निम्न उपाय अपनाने की सलाह देते हैं:
- तालाब के पानी की गुणवत्ता नियमित रूप से जांचें और संतुलन बनाए रखें।
- पत्तियों और मलबे को जाल से हटाते रहें ताकि पानी साफ रहे।
- पानी की सतह पर बर्फ या अत्यधिक ठंड जमा न होने दें।
- एरियेटर का इस्तेमाल कर पानी में ऑक्सीजन की पर्याप्त मात्रा बनाए रखें।
- फिल्ट्रेशन सिस्टम को सक्रिय रखें ताकि हानिकारक तत्व बाहर निकल सकें।
- ट्यूबवेल या पंपसेट से समय-समय पर पानी का पुनर्चक्रण करें।
- पानी में नुकसानदायक गैसों के जमाव को रोकें।
- ऐसी प्रजातियों का पालन करें जो तापमान के उतार-चढ़ाव को सहन करने में सक्षम हों।
विशेषज्ञों का मानना है कि फरवरी और मार्च का संक्रमण काल मछली पालन के लिए सबसे संवेदनशील होता है। इस दौरान जरा सी लापरवाही भी बड़े नुकसान का कारण बन सकती है। नियमित निगरानी, साफ-सफाई और पानी के तापमान का संतुलन बनाए रखना ही सफल मछली पालन की कुंजी है।
ये भी पढ़ें: आम के रोग व कीट बढ़ा सकते हैं संकट, ऐसे करें देखभाल
