खेती-किसानी

मक्के पर मंडरा रहा फॉल आर्मी वॉर्म का खतरा, लापरवाही पड़ सकती है भारी, ऐसे करें बचाव

नई दिल्ली: खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ देश के विभिन्न हिस्सों में मक्का की बुआई का काम तेज़ी से किया गया है। ज्यादातर किसानों ने जून महीने में मक्का बोई है, जबकि कुछ किसान जुलाई की शुरुआत में भी इसकी बुवाई कर रहे हैं। लेकिन जून में बोई गई मक्का की फसल अब एक गंभीर खतरे से जूझ रही है। कृषि वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि बुवाई के 20 से 25 दिन बाद मक्का की फसल पर फॉल आर्मी वॉर्म (Fall Armyworm) नामक कीट का हमला हो सकता है, जो शुरुआती अवस्था वाली फसल के लिए बेहद विनाशकारी साबित हो सकता है। फसल को लेकर किसानों की मेहनत और उम्मीदों पर पानी फिर सकता है अगर समय रहते इस कीट पर नियंत्रण नहीं पाया गया। ऐसे में जरूरी है कि किसान समय रहते इस कीट की पहचान करें और उचित उपाय अपनाएं।

तेजी से फैलने वाला कीट है फॉल आर्मी वॉर्म

फॉल आर्मी वॉर्म एक ऐसा कीट है जो खासकर मक्का की फसल को शुरुआती अवस्था में ही निशाना बनाता है। यह कीट रात में अधिक सक्रिय रहता है और बहुत तेजी से फैलता है। शुरुआत में यह मक्का की ऊपरी पत्तियों में छोटे-छोटे छेद करता है और फिर पौधे के गुब्बे में घुसकर पूरी पत्तियों को चट कर जाता है। अगर शुरुआत में ही इसे नहीं रोका गया तो पूरा खेत इसकी चपेट में आ सकता है, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक इस कीट का प्रकोप आमतौर पर बुवाई के 20-25 दिन बाद दिखाई देता है, जो मक्का के लिए बेहद संवेदनशील समय होता है।

कैसे पहचानें फॉल आर्मी वॉर्म की मौजूदगी?

इस खतरनाक कीट की पहचान के लिए किसानों को रोजाना खेतों का निरीक्षण करना जरूरी है। इसकी कुछ प्रमुख पहचान इस प्रकार हैं: मक्का की पत्तियों में सीध में बने छोटे छेद, पत्तियों का बीच से कटा होना, पत्तों के बीच गंदगी और कीट का मल जमा होना, पौधे के गड्डे (गुब्बे) में कीड़े का छिपा होना और संभव है कई बार कीट सीधे न दिखे, लेकिन उसके मल और नुकसान से उसकी मौजूदगी का संकेत मिलता है।

देसी उपाय: नीम तेल और फेरोमोन ट्रैप

प्रारंभिक अवस्था में अगर कीट का हमला दिखता है तो प्राकृतिक उपायों से भी इसका असर कम किया जा सकता है। किसान खेतों में फेरोमोन ट्रैप लगाएं, जिससे कीट की मौजूदगी और उसकी संख्या का अंदाजा लगाया जा सके। इसके अलावा, 3000 बीएमपी ग्रेड के नीम तेल का इस्तेमाल एक प्रभावी देसी उपाय है। इसके लिए 1 लीटर नीम तेल को 5 लीटर पानी में मिलाकर फसल पर छिड़काव करें। यह छिड़काव हर 5-6 दिन के अंतराल पर कम से कम दो बार करना चाहिए। इससे कीटों की सक्रियता में काफी कमी आ सकती है।

रासायनिक नियंत्रण जब संक्रमण बढ़ जाए

अगर फॉल आर्मी वॉर्म का प्रकोप ज्यादा फैल गया हो, तो रासायनिक नियंत्रण अनिवार्य हो जाता है। इसके लिए कृषि वैज्ञानिक निम्न उपाय सुझाते हैं: क्लोरएन्ट्रानिलिप्रोल दवा का 60 मिली डोज को 200 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ छिड़काव करें। एक सप्ताह बाद स्पाइनोसेड या पुनः क्लोरएन्ट्रानिलिप्रोल का स्प्रे करें। इसके अलावा, दानेदार कार्बोफ्रान का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। यह दवा पौधों में घुलकर गैस छोड़ती है, जो इल्ली को अंदर ही मार देती है। इन उपायों के साथ यदि किसान नियमित निगरानी रखें और समय पर छिड़काव करें, तो फॉल आर्मी वॉर्म जैसे खतरनाक कीट से मक्का की फसल को बचाया जा सकता है।

कृषि विभाग की सलाह

कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे मक्का की फसल पर विशेष निगरानी रखें और किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज न करें। विभाग ने यह भी कहा है कि शुरुआती लक्षण दिखते ही नजदीकी कृषि केंद्र से संपर्क करें और स्थानीय कृषि वैज्ञानिकों की सलाह के अनुसार ही कीटनाशकों का प्रयोग करें। खरीफ सीजन में मक्का किसानों के लिए एक बड़ी आमदनी का जरिया बन सकती है, लेकिन फॉल आर्मी वॉर्म जैसे कीट समय पर नियंत्रित न किए जाएं तो यह फसल पूरी तरह बर्बाद कर सकते हैं। इसलिए किसानों को चाहिए कि वे समय रहते सतर्कता बरतें और वैज्ञानिक सलाह के अनुसार सामयिक उपाय करें। तभी जाकर मेहनत रंग लाएगी और फसल सुरक्षित रह सकेगी।

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