खेती-किसानी

कुफरी रूबी आलू: मात्र 90 दिनों में तैयार होगी यह नई किस्म, जानिए ख़ासियत

Kufri Ruby potato

शिमला, 27 जुलाई 2026: देश के आलू उत्पादक किसानों के लिए राहत और कमाई बढ़ाने वाली महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान ने आलू की नई किस्म कुफरी रूबी विकसित की है। यह किस्म विशेष रूप से छोटे आकार के आलू के उत्पादन के लिए तैयार की गई है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि मात्र 90 दिनों में तैयार होने वाली फसल में लगभग 60 प्रतिशत छोटे आकार के आलू प्राप्त होते हैं। बढ़ती मांग को देखते हुए यह किस्म किसानों के लिए बेहतर आमदनी का माध्यम बन सकती है, क्योंकि इसका उपयोग खाद्य प्रसंस्करण, होटल, भोजनालय और संगठित खुदरा बाजार में तेजी से बढ़ रहा है।

कम समय में तैयार होकर देगी बेहतर उत्पादन

कुफरी रूबी मध्यम अवधि में तैयार होने वाली आलू की किस्म है, जिसकी फसल लगभग 90 दिनों में तैयार हो जाती है। कम अवधि होने के कारण किसान एक ही मौसम में समय पर फसल लेकर अगली खेती की तैयारी भी जल्दी कर सकते हैं। इस किस्म के आलू का बाहरी छिलका लाल रंग का होता है, जबकि अंदर का गूदा पीले रंग का रहता है। आकर्षक रंग और बेहतर गुणवत्ता के कारण बाजार में इसकी अच्छी मांग रहने की संभावना जताई जा रही है।

प्रति हेक्टेयर मिलेगा अच्छा उत्पादन

इस किस्म से औसतन 23 से 25 टन प्रति हेक्टेयर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। यदि किसान वैज्ञानिक विधियों के अनुसार खेती करें, समय पर सिंचाई करें, संतुलित पोषण प्रबंधन अपनाएं तथा रोग और कीट नियंत्रण पर ध्यान दें, तो अधिक गुणवत्ता के साथ बेहतर उत्पादन हासिल कर सकते हैं। इससे किसानों की आय बढ़ने की संभावना भी मजबूत होती है।

छोटे आकार के आलू की बढ़ रही मांग

कुफरी रूबी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसकी तैयार फसल का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा छोटे आकार के आलू का होता है। वर्तमान समय में ऐसे आलू की मांग खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, चिप्स निर्माण, फ्रेंच फ्राइज, होटल, भोजनालय और पैक खाद्य उत्पादों में लगातार बढ़ रही है। ऐसे में किसानों को इस किस्म के माध्यम से बेहतर बाजार और अधिक मूल्य मिलने की उम्मीद है।

गुणवत्ता भी रहेगी बेहतर

इस किस्म में आलू के फटने और अंदर खाली स्थान बनने जैसी समस्याएं बहुत कम देखने को मिलती हैं। इससे किसानों को अधिक गुणवत्ता वाली उपज प्राप्त होती है और बाजार में बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ जाती है। अच्छी गुणवत्ता के कारण भंडारण और विपणन में भी किसानों को लाभ मिल सकता है।

प्रमुख आलू उत्पादक राज्यों के लिए उपयुक्त

केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान के अनुसार, कुफरी रूबी उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और गुजरात सहित देश के प्रमुख आलू उत्पादक क्षेत्रों के लिए उपयुक्त किस्म है। इन राज्यों के किसान इस किस्म को अपनाकर उत्पादन बढ़ाने के साथ बेहतर आर्थिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

खेती के लिए अपनाएं वैज्ञानिक तरीका

इस किस्म की खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली दोमट या बलुई दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है। उत्तर भारत में इसकी बुवाई अक्टूबर से नवंबर के बीच की जाती है। किसानों को प्रमाणित और रोगमुक्त बीज कंद का उपयोग करना चाहिए। कतार से कतार लगभग 60 सेंटीमीटर तथा पौधे से पौधे 20 से 25 सेंटीमीटर की दूरी रखना लाभकारी रहता है। खेत में अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद के साथ संतुलित मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग करें। समय-समय पर सिंचाई, खरपतवार नियंत्रण तथा फसल की नियमित निगरानी करने से बेहतर गुणवत्ता और अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।

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