कृषि समाचार

बिहार में बागवानी किसानों को 75 प्रतिशत तक अनुदान

Horticulture farmers in Bihar get subsidy

पटना, 27 जुलाई 2026: बिहार के बागवानी किसानों के लिए राहत देने वाली बड़ी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने बागवानी फसलों में कीट एवं रोग प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए नई योजना शुरू की है। कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बताया कि इस वर्ष से “बगीचों में कीट प्रबंधन योजना” लागू की गई है। इस योजना के तहत आम, लीची और अमरूद के बगीचों में वैज्ञानिक, सुरक्षित और समयबद्ध कीटनाशी छिड़काव पर किसानों को अनुदान दिया जाएगा। इससे किसानों पर दवा छिड़काव का आर्थिक बोझ कम होगा और बागवानी की लागत में भी कमी आएगी।

आम, लीची और अमरूद पर मिलेगा 75 प्रतिशत तक अनुदान

योजना के तहत तीन प्रमुख फलदार फसलों के लिए अलग-अलग अनुदान राशि निर्धारित की गई है। आम के बगीचों में कीट, रोग और फल झड़ने की समस्या के नियंत्रण के लिए पहले छिड़काव पर प्रति पेड़ 57 रुपये तथा दूसरे छिड़काव पर 72 रुपये की दर से 75 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा। अमरूद के बगीचों में पहले छिड़काव के लिए प्रति पेड़ 33 रुपये तथा दूसरे छिड़काव के लिए 45 रुपये का अनुदान मिलेगा। वहीं लीची के बगीचों में पहले छिड़काव पर प्रति पेड़ 162 रुपये और दूसरे छिड़काव पर 114 रुपये तक की सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इन सभी फसलों में सरकार लगभग 75 प्रतिशत तक अनुदान देकर किसानों की लागत कम करने का प्रयास कर रही है।

ऑनलाइन आवेदन कर उठा सकते हैं लाभ

कृषि विभाग ने किसानों से योजना का अधिक से अधिक लाभ लेने की अपील की है। इच्छुक किसान कृषि विभाग के ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर अनुदानित कीटनाशी छिड़काव सुविधा प्राप्त कर सकते हैं। सरकार का उद्देश्य अधिक से अधिक बागवानी किसानों को इस योजना से जोड़कर उनकी खेती को अधिक लाभकारी बनाना है।

कीट और रोग नियंत्रण से बढ़ेगा उत्पादन

कृषि मंत्री ने कहा कि बागवानी फसलों में समय पर कीट एवं रोग नियंत्रण नहीं होने पर उत्पादन और गुणवत्ता दोनों प्रभावित होते हैं। ऐसे में यह योजना किसानों को समय पर आवश्यक छिड़काव कराने में मदद करेगी, जिससे फलों की गुणवत्ता बेहतर होगी और उत्पादन में भी वृद्धि होगी।

किसानों की आय बढ़ाने पर सरकार का जोर

सरकार का मानना है कि इस योजना के माध्यम से किसानों का दवा छिड़काव पर होने वाला खर्च कम होगा, उत्पादन लागत घटेगी और अधिक गुणवत्ता वाली उपज मिलने से बेहतर बाजार मूल्य प्राप्त होगा। इससे बागवानी करने वाले किसानों की आय बढ़ाने के साथ राज्य में फल उत्पादन को भी नई मजबूती मिलेगी।

ये भी पढ़ें: कुफरी रूबी आलू: मात्र 90 दिनों में तैयार होगी यह नई किस्म, जानिए ख़ासियत

Related posts

Leave a Comment