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अल नीनो से पहले फसल बीमा कराएं, 31 जुलाई अंतिम तिथि

Get crop insurance before El Nino

नई दिल्ली, 27 जुलाई 2026: देश के कई हिस्सों में अल नीनो की आशंका और उससे जुड़े मौसमीय बदलाव किसानों की चिंता बढ़ा रहे हैं। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अल नीनो का प्रभाव बढ़ता है, तो सामान्य वर्षा का क्रम प्रभावित हो सकता है, जिससे सूखे जैसी परिस्थितियां बनने की संभावना रहती है। इसके साथ ही फसलों पर कीटों और बीमारियों का प्रकोप भी बढ़ सकता है। ऐसे हालात में किसानों की उपज घटने के साथ आर्थिक नुकसान का जोखिम भी बढ़ जाता है। इसी को देखते हुए किसानों को समय रहते प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ लेने की सलाह दी जा रही है। खरीफ फसलों के लिए बीमा पंजीकरण की अंतिम तिथि 31 जुलाई निर्धारित है, जबकि धान की फसल के लिए यह अवधि 15 अगस्त तक रहेगी।

अल नीनो से खेती पर बढ़ सकता है संकट

अल नीनो सक्रिय होने पर वर्षा का वितरण असंतुलित हो सकता है। कहीं कम वर्षा तो कहीं लंबे समय तक सूखे जैसी स्थिति बनने से फसलें प्रभावित होती हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, जिन क्षेत्रों में मौसम तेजी से बदलता है, वहां इसका प्रभाव अधिक गंभीर हो सकता है। ऐसी परिस्थितियों में किसानों की आय घटती है और कई बार उन्हें खेती जारी रखने के लिए कर्ज का सहारा लेना पड़ता है।

मौसमीय जोखिम से बचाव का मजबूत सहारा

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों को प्राकृतिक आपदाओं और मौसम से जुड़े जोखिमों के दौरान आर्थिक सुरक्षा प्रदान करती है। यदि सूखा, बाढ़, ओलावृष्टि, बेमौसम वर्षा, कीट प्रकोप, बीमारी या उत्पादन में भारी गिरावट के कारण फसल खराब होती है, तो बीमित किसान योजना के तहत सहायता राशि प्राप्त कर सकते हैं। इससे खेती में हुए नुकसान की भरपाई करने के साथ अगली फसल की तैयारी भी आसान हो जाती है।

कम प्रीमियम में मिलता है व्यापक सुरक्षा कवच

योजना के तहत किसानों को बहुत कम प्रीमियम देना होता है। खरीफ फसलों के लिए किसानों का अंश केवल 2 प्रतिशत निर्धारित है, जबकि शेष राशि केंद्र और राज्य सरकारें वहन करती हैं। किसान बैंक, अधिकृत केंद्रों अथवा योजना के आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से समय रहते अपना पंजीकरण करा सकते हैं। विभिन्न फसलों और क्षेत्रों के अनुसार प्रीमियम की जानकारी भी उपलब्ध कराई जाती है।

नुकसान होने पर तुरंत दें सूचना

यदि मौसमीय कारणों से फसल को नुकसान होता है, तो किसानों को 72 घंटे के भीतर इसकी सूचना संबंधित बीमा कंपनी, कृषि विभाग, बैंक अथवा योजना के किसान अनुप्रयोग के माध्यम से देनी चाहिए। दावा प्रक्रिया के लिए आवश्यक दस्तावेज और नुकसान का विवरण प्रस्तुत करना होता है। डिजिटल माध्यमों के जरिए शिकायत दर्ज कराने और उसकी प्रगति की जानकारी प्राप्त करने की सुविधा भी उपलब्ध है।

बुवाई नहीं होने पर भी मिल सकता है लाभ

यदि कम वर्षा या सूखे की वजह से किसान बुवाई नहीं कर पाते हैं अथवा बीज अंकुरित नहीं हो पाते, तो इसे बुवाई न हो पाने की स्थिति माना जाता है। योजना के प्रावधानों के अनुसार ऐसी परिस्थितियों में पात्र किसानों को बीमित राशि का 25 प्रतिशत तक मुआवजा दिया जा सकता है। इससे किसानों को शुरुआती आर्थिक राहत मिलती है और वे अगली कृषि गतिविधियों की तैयारी कर सकते हैं।

बदलते मौसम में फसल बीमा की बढ़ी अहमियत

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन और मौसम की बढ़ती अनिश्चितता के दौर में फसल बीमा किसानों के लिए आवश्यक सुरक्षा कवच बन गया है। अल नीनो जैसी परिस्थितियों से होने वाले सूखे, उत्पादन में कमी और आर्थिक संकट से बचाव के लिए किसानों को अंतिम तिथि से पहले बीमा अवश्य कराना चाहिए। समय पर बीमा कराने से न केवल संभावित नुकसान की भरपाई संभव होती है, बल्कि किसान बिना अतिरिक्त आर्थिक दबाव के अगली फसल की तैयारी भी कर सकते हैं।

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