नई दिल्ली: कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट के अनुसार देश में ग्रीष्मकालीन फसलों की बुआई में इस वर्ष उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 08 मई 2026 तक कुल 83.08 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुआई हो चुकी है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 80.01 लाख हेक्टेयर थी। इस प्रकार कुल 3.07 लाख हेक्टेयर का इजाफा हुआ है, जो किसानों के बदलते रुझान और फसल चयन को दर्शाता है।
दलहन फसलों में बढ़ा रुझान
इस वर्ष दलहन फसलें किसानों की पहली पसंद बनकर उभरी हैं। कुल 24.97 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में दलहन की बुआई हुई है, जो पिछले वर्ष 23.76 लाख हेक्टेयर थी। इसमें मूंग का क्षेत्र सबसे अधिक 20.07 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि उड़द की बुआई में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। अन्य दलहन फसलों का भी सीमित विस्तार देखने को मिला है।
मोटे अनाज की बढ़ती मांग
सरकार द्वारा मोटे अनाज को बढ़ावा देने के प्रयासों का असर भी साफ दिखाई दे रहा है। इस वर्ष 16.01 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में इन फसलों की बुआई हुई है, जो पिछले वर्ष 14.25 लाख हेक्टेयर थी। मक्का की बुआई में सबसे अधिक वृद्धि देखी गई है, जबकि बाजरा, ज्वार और रागी में भी हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
तिलहन फसलों ने पकड़ी रफ्तार
तिलहन फसलों का क्षेत्र भी इस वर्ष बढ़कर 11.04 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो पिछले वर्ष 9.58 लाख हेक्टेयर था। मूंगफली की बुआई में सबसे अधिक बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि तिल और सूरजमुखी के क्षेत्र में भी विस्तार हुआ है। यह बदलाव खाद्य तेलों की बढ़ती मांग और बेहतर कीमतों का संकेत देता है।
धान की बुआई में गिरावट
जहां अधिकांश फसलों में बढ़ोतरी हुई है, वहीं धान की बुआई में कमी दर्ज की गई है। इस वर्ष 31.05 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की बुआई हुई, जो पिछले वर्ष 32.42 लाख हेक्टेयर थी। यह गिरावट दर्शाती है कि किसान अब कम पानी वाली और अधिक लाभकारी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं।
बदलते रुझान का संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि जल संसाधनों की उपलब्धता, बाजार की मांग और सरकारी योजनाओं के प्रभाव के कारण किसानों का झुकाव दलहन, तिलहन और मोटे अनाज की ओर बढ़ रहा है। यह बदलाव न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक हो सकता है, बल्कि फसल विविधता और पोषण सुरक्षा को भी मजबूत करेगा।
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