नई दिल्ली: केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि क्षेत्र की मौजूदा स्थिति और आगामी खरीफ सीजन की तैयारियों को लेकर उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में मौसम पूर्वानुमान, जल उपलब्धता, फसलों की स्थिति, बीज और कृषि सामग्री की व्यवस्था तथा राज्यों की तैयारियों की समीक्षा की गई। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों के हितों की सुरक्षा के लिए सभी जरूरी इंतजाम समय रहते पूरे किए जाएं।
सामान्य से कम रह सकता है मॉनसून
बैठक में जानकारी दी गई कि इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम वर्षा सामान्य से कम रह सकती है और यह दीर्घकालीन औसत का लगभग 92 प्रतिशत रहने का अनुमान है। साथ ही अल नीनो जैसी स्थिति बनने की संभावना भी जताई गई है। मंत्री ने कहा कि सरकार इन संकेतों को गंभीरता से लेते हुए पहले से तैयारी कर रही है, ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
जलाशयों में पानी का बेहतर भंडारण
खरीफ सीजन की समीक्षा में बताया गया कि देश के जलाशयों में इस समय पानी का स्तर सामान्य से बेहतर है और कुल भंडारण लगभग 127 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इससे खरीफ सत्र में सिंचाई की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी और खेतों में नमी की कमी की आशंका कम होगी।
आधुनिक तकनीक से कम होगा प्रभाव
बैठक में यह भी बताया गया कि यदि अल नीनो का असर होता है, तब भी कृषि क्षेत्र पर इसका प्रभाव पहले की तुलना में कम रहने की संभावना है। इसका कारण बेहतर जल प्रबंधन, सूक्ष्म सिंचाई, वैज्ञानिक सलाह और फसल विविधीकरण जैसे उपाय हैं, जिनसे खेती अधिक मजबूत और अनुकूल बन रही है।
राज्यों को दिए गए विशेष निर्देश
कृषि मंत्री ने सभी राज्यों को निर्देश दिए कि वे किसी भी प्रतिकूल मौसम की स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी रखें। जिला स्तर तक आकस्मिक योजनाओं को सक्रिय करने, बीज और उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा सूखा सहनशील किस्मों को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।
किसानों के लिए वैकल्पिक योजनाएं
बैठक में बताया गया कि खरीफ और रबी दोनों सत्रों के लिए बीज की उपलब्धता पर्याप्त है और आकस्मिक परिस्थितियों के लिए राष्ट्रीय बीज भंडार भी तैयार रखा गया है। जरूरत पड़ने पर किसानों को वैकल्पिक फसल विकल्प और देरी से बुवाई की रणनीति भी उपलब्ध कराई जाएगी।
लगातार निगरानी और समन्वय
मंत्री ने कहा कि सरकार का निगरानी तंत्र पूरी तरह सक्रिय है और राज्यों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा जा रहा है। फसलों और मौसम की नियमित निगरानी के साथ जिला स्तर की योजनाओं को अपडेट किया जा रहा है, ताकि समय पर निर्णय लेकर किसानों को राहत दी जा सके। उन्होंने भरोसा दिलाया कि बेहतर तैयारी, नई तकनीकों और समन्वित प्रयासों के माध्यम से संभावित चुनौतियों का प्रभाव कम किया जाएगा और किसानों के हितों की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।
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