नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने देश में पेस्टिसाइड नियमों में बड़े बदलाव की दिशा में कदम बढ़ाते हुए नया ड्राफ्ट पेस्टिसाइड मैनेजमेंट बिल, 2025 जारी किया है। यह प्रस्तावित बिल पुराने ‘इनसेक्टिसाइड्स एक्ट, 1968’ और ‘इनसेक्टिसाइड्स रूल्स, 1971’ को रिप्लेस करेगा। लंबे समय से प्रतीक्षित इस बिल का उद्देश्य देश में कीटनाशकों की गुणवत्ता, सुरक्षा और ट्रैकिंग सिस्टम को आधुनिक बनाना है।
कृषि विशेषज्ञों और किसानों का कहना है कि नकली और कमजोर गुणवत्ता वाले कीटनाशकों ने खेती-बाड़ी में गंभीर नुकसान पहुंचाया है। अब इस बिल के आने से किसानों को सुरक्षित, असरदार और प्रमाणित कीटनाशक उपलब्ध कराने का रास्ता साफ होगा। साथ ही, यह पर्यावरण और छोटे जीवों जैसे मधुमक्खियों और जानवरों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।
पुराने कानून की सीमाएं
वर्तमान में देश में जो कानून चला आ रहा है, वह 1968 के समय की जरूरतों के हिसाब से तैयार किया गया था। तब की फसलों पर कीटों का खतरा कम था और कीटनाशकों की संख्या सीमित थी। लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, कीटनाशकों का गलत या असुरक्षित इस्तेमाल जानलेवा साबित हो सकता है। हर साल अनुमानित 7,700 से अधिक मौतें कीटनाशकों से जुड़े हादसों और विषाक्तता के कारण होती हैं।
इसके अलावा, पुराने कानून में ट्रैकिंग सिस्टम का अभाव था। फैक्ट्री से खेत तक कीटनाशक कैसे पहुंचता है और उसकी गुणवत्ता क्या है, इसे मॉनिटर करने का कोई डिजिटल या प्रभावी तरीका नहीं था। यही कारण है कि नकली कीटनाशकों का बाजार तेजी से फैल सका।
नया बिल: नई दिशा
नई पेस्टिसाइड मैनेजमेंट बिल में कई अहम बदलाव किए गए हैं।
डिजिटल रजिस्ट्री
बिल के तहत हर पेस्टिसाइड के निर्माण से लेकर खेत तक पहुंचने और उसके असर को नेशनल डिजिटल रजिस्ट्री के माध्यम से ट्रैक किया जाएगा।
किसान और कर्मचारियों की सुरक्षा
अब पेस्टिसाइड से जुड़े कर्मचारियों और किसानों के लिए प्रोटेक्टिव गियर, ट्रेनिंग और सुरक्षित हैंडलिंग नियम अनिवार्य होंगे।
वैज्ञानिक परीक्षण पर आधारित मंजूरी
नए कीटनाशकों को केवल तब अनुमति दी जाएगी जब उनका प्रभाव, पर्यावरणीय असर और जहर फैलने का खतरा वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं में पूरी तरह परीक्षण करने के बाद सुरक्षित पाया जाएगा।
नए बिल की आवश्यकता
भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जो कीटनाशकों का सबसे अधिक उत्पादन और उपयोग करते हैं। वर्तमान कानून की कमजोर निगरानी और पुरानी प्रक्रियाओं के कारण किसानों, आम जनता और पर्यावरण को कई नुकसान उठाने पड़े हैं। नया बिल न केवल किसानों के हित में है, बल्कि यह खाद्य सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और जनस्वास्थ्य के लिए भी राष्ट्रीय महत्व रखता है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह बिल देश में कीटनाशक उद्योग में पारदर्शिता लाने, नकली उत्पादों पर नियंत्रण करने और किसानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण साबित होगा।
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