खेती-किसानी

मिट्टी जांच में न करें ये 7 गलतियां, वरना घट सकती है फसल की पैदावार

Soil Health testing

पटना: अच्छी फसल के लिए केवल उन्नत बीज, सिंचाई और उर्वरकों का सही उपयोग ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि सही मिट्टी जांच भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। यदि मिट्टी का नमूना वैज्ञानिक तरीके से नहीं लिया जाता, तो जांच रिपोर्ट गलत आ सकती है। इसका असर उर्वरकों की मात्रा, खेती की लागत और फसल की पैदावार पर पड़ता है। इसी को ध्यान में रखते हुए बिहार कृषि विभाग ने किसानों के लिए मिट्टी का नमूना लेते समय अपनाई जाने वाली सात महत्वपूर्ण सावधानियां बताई हैं।

मिट्टी का नमूना लेते समय रखें इन सात बातों का ध्यान

कृषि विभाग के अनुसार मिट्टी का नमूना हमेशा सामान्य या सूखी अवस्था में लेना चाहिए। ऐसे में इन बातों का ध्यान रखना आवश्यक होता है:

  • गीली मिट्टी से लिया गया नमूना सही परिणाम नहीं देता और जांच रिपोर्ट प्रभावित हो सकती है।
  • जिस स्थान पर हाल ही में गोबर की खाद, रासायनिक उर्वरक या अन्य पोषक तत्व डाले गए हों, वहां से नमूना नहीं लेना चाहिए। इससे मिट्टी की वास्तविक पोषक स्थिति का सही आकलन नहीं हो पाता।
  • पेड़ों के नीचे की मिट्टी से भी नमूना लेने से बचना चाहिए, क्योंकि वहां पोषक तत्वों का संतुलन खेत के अन्य हिस्सों से अलग हो सकता है।
  • सिंचाई की नालियों के आसपास की मिट्टी में नमी और पोषक तत्वों का स्तर अलग होता है। इसलिए खेत के बीच वाले हिस्से से नमूना लेना अधिक उपयुक्त माना जाता है।
  • यदि खेत में फसल खड़ी हो तो उस समय मिट्टी का नमूना नहीं लेना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार फसल कटाई के बाद या नई बुवाई से पहले नमूना लेना सबसे बेहतर रहता है।
  • सामान्य फसलों के लिए मिट्टी का नमूना लगभग 15 सेंटीमीटर की गहराई से लेना चाहिए, ताकि जड़ों वाले क्षेत्र की सही जानकारी मिल सके।
  • यदि बागवानी या फलदार पौधों की खेती के लिए मिट्टी की जांच करानी हो, तो लगभग 65 सेंटीमीटर की गहराई से नमूना लेना चाहिए। इससे गहरी जड़ों तक की मिट्टी की वास्तविक स्थिति का पता चलता है।

सही जांच से घटेगी लागत, बढ़ेगा उत्पादन

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि मिट्टी जांच रिपोर्ट के आधार पर किसान आवश्यकता के अनुसार ही उर्वरकों और पोषक तत्वों का उपयोग कर सकते हैं। इससे अनावश्यक खर्च कम होता है, मिट्टी की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है और फसल की पैदावार में भी सुधार होता है।

वैज्ञानिक तरीके से लिया गया मिट्टी का नमूना किसानों को सही कृषि सलाह दिलाने में मदद करता है। इससे न केवल खेती अधिक लाभकारी बनती है, बल्कि उर्वरकों का संतुलित उपयोग कर पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान मिलता है। इसलिए हर किसान को मिट्टी की जांच कराते समय निर्धारित सावधानियों का पालन अवश्य करना चाहिए।

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