कानपुर: कभी सिर्फ शहरी भोजन का हिस्सा समझे जाने वाले मशरूम की अब गांव-गांव में डिमांड तेजी से बढ़ रही है। पोषण, स्वाद और बाजार मूल्य के लिहाज से मशरूम न केवल एक बेहतरीन विकल्प बन चुका है, बल्कि यह कम लागत में अधिक मुनाफा देने वाली खेती के रूप में भी उभर रहा है। इसी को देखते हुए चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर में 7 जुलाई से 12 जुलाई 2025 तक मशरूम उत्पादन तकनीक पर छह दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। यह प्रशिक्षण विश्वविद्यालय के पादप रोग विज्ञान विभाग के अंतर्गत स्थित मशरूम शोध एवं विकास केंद्र में होगा।
मशरूम शोध केंद्र के नोडल अधिकारी डॉ. एसके विश्वास ने बताया कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम विशेष रूप से उन लोगों के लिए डिजाइन किया गया है, जो मशरूम की खेती को एक व्यवसाय के रूप में अपनाना चाहते हैं। इसमें किसान, छात्र, महिला उद्यमी, बेरोजगार युवा या शहरी क्षेत्र के इच्छुक लोग शामिल हो सकते हैं। उनका कहना है कि यह एक ऐसा मौका है, जिसमें न केवल मशरूम उत्पादन की थ्योरी सिखाई जाएगी बल्कि व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा, जिससे प्रतिभागी सीधे तौर पर इसका उपयोग करके व्यवसाय शुरू कर सकें।
प्रशिक्षण के दौरान एस्टर, बटन और मिल्की मशरूम की खेती की विधियों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इन किस्मों को इसलिए चुना गया है क्योंकि ये न केवल पोषण से भरपूर हैं, बल्कि इनकी बाजार में मांग और बिक्री मूल्य भी अधिक है। प्रशिक्षण में खेती की प्रक्रिया, बीज उत्पादन, देखभाल, रोग नियंत्रण और विपणन तक की पूरी जानकारी दी जाएगी। इस प्रशिक्षण में भाग लेने के लिए इच्छुक लोगों को 1,000 रुपये पंजीकरण शुल्क देना होगा। साथ में आधार कार्ड की एक प्रति और पासपोर्ट साइज फोटो भी जमा करनी होगी। जो प्रतिभागी अन्य जिलों या राज्यों से आते हैं, उनके लिए विश्वविद्यालय परिसर में रुकने की सुविधा उपलब्ध है, लेकिन उसका खर्च उन्हें खुद वहन करना होगा।
विश्वविद्यालय के मीडिया प्रभारी डॉ. खलील खान ने जानकारी दी कि प्रशिक्षण पूरा करने वाले सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र भी दिया जाएगा, जो भविष्य में उनके व्यवसाय या किसी योजना से जुड़ने में मददगार साबित हो सकता है। उन्होंने बताया कि इस विषय में अधिक जानकारी या रजिस्ट्रेशन के लिए 9369060041 नंबर पर संपर्क किया जा सकता है। डॉ. खलील खान का कहना है कि मशरूम की खेती विशेष रूप से उन लोगों के लिए फायदेमंद है, जिनके पास कम ज़मीन और सीमित संसाधन हैं। उन्होंने बताया कि गुलाबी मशरूम एक ऐसी किस्म है जिसे सूखाकर भी लंबे समय तक इस्तेमाल किया जा सकता है। यह पानी में उबालने के बाद फिर से ताजे जैसा स्वाद और पोषण देता है। ऐसे में इसकी ग्रामीण और शहरी दोनों बाजारों में भारी मांग है।
मशरूम केवल एक स्वादिष्ट सब्जी नहीं है, बल्कि यह एक पोषण का पावरहाउस भी है। इसमें प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, विटामिन्स, मिनरल्स सहित ऐसे कई तत्व पाए जाते हैं, जो हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने, सूजन से लड़ने और हृदय रोगों से बचाव में मदद करते हैं। यही वजह है कि इसे आधुनिक आहार और आयुर्वेदिक चिकित्सा दोनों में स्थान मिला है। मशरूम उत्पादन अब केवल विकल्प नहीं, बल्कि गंभीर व्यवसाय और पोषण का स्रोत बनता जा रहा है। ऐसे में इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल रोजगार के नए रास्ते खोलते हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की दिशा में भी अहम भूमिका निभाते हैं।
