लखनऊ: उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल बैठक में किसानों के हित में बड़ा फैसला लिया गया है। बैठक में कुल पैंतीस महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई, जिनमें गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP of wheat in UP) में वृद्धि सबसे अहम रही। सरकार ने गेहूं का समर्थन मूल्य एक सौ साठ रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाने को मंजूरी दी है, जिससे किसानों को सीधा फायदा मिलेगा।
गेहूं खरीद और समर्थन मूल्य पर बड़ा निर्णय
मंत्रिमंडल बैठक के बाद जानकारी देते हुए बताया गया कि इस वर्ष गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP of wheat in UP) दो हजार पांच सौ पचासी रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में एक सौ साठ रुपये अधिक है। गेहूं की खरीद पच्चीस मार्च दो हजार छब्बीस से पंद्रह जून दो हजार छब्बीस तक की जाएगी। राज्य में कुल छह हजार पांच सौ क्रय केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जो सभी पचहत्तर जनपदों में संचालित होंगे। आठ विभिन्न क्रय एजेंसियों के माध्यम से खरीद की व्यवस्था की जाएगी। क्रय केंद्र सुबह नौ बजे से शाम छह बजे तक खुले रहेंगे, हालांकि जिलाधिकारी स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार समय में बदलाव कर सकेंगे।
किसानों को सीधा लाभ और पारदर्शी प्रक्रिया
सरकार का उद्देश्य है कि किसानों को मूल्य समर्थन योजना का अधिकतम लाभ मिले। यदि किसान क्रय केंद्रों पर गेहूं लेकर आते हैं, तो न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद सुनिश्चित की जाएगी। इस बार खरीद प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए इलेक्ट्रानिक मशीनों के माध्यम से किसानों का बायोमेट्रिक सत्यापन किया जाएगा। मोबाइल क्रय केंद्रों पर भी खरीद की सुविधा दी जाएगी, जहां हर खरीद का स्थान संबंधित जानकारी के साथ दर्ज किया जाएगा। इसके अलावा बटाईदार किसान भी पंजीकरण कराकर अपनी फसल बेच सकेंगे, जिससे अधिक किसानों को योजना का लाभ मिलेगा।
भुगतान और पंजीकरण की नई व्यवस्था
सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि किसानों को उनकी उपज का भुगतान अधिकतम अड़तालीस घंटे के भीतर सीधे उनके बैंक खाते में किया जाए। इसके साथ ही पंजीकृत ट्रस्ट के माध्यम से भी गेहूं खरीद की व्यवस्था लागू की गई है, जिसमें अधिकृत प्रतिनिधि के सत्यापन के बाद भुगतान किया जाएगा।
इस बार रिकॉर्ड उत्पादन का अनुमान
राज्य में इस बार गेहूं की बुआई बड़े स्तर पर की गई है। करीब पचानवे लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की खेती हुई है और उत्पादन का अनुमान चार सौ पच्चीस लाख टन तक लगाया जा रहा है। पिछले वर्ष की तुलना में यह वृद्धि किसानों के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। सरकार का मानना है कि बढ़े हुए समर्थन मूल्य और बेहतर खरीद व्यवस्था से किसानों की आय में वृद्धि होगी और उन्हें अपनी फसल का उचित मूल्य मिल सकेगा।
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