नई दिल्ली: ये आम धारणा है कि बकरियों को मुख्य रूप से मांस के लिए पाला जाता है, लेकिन सच यह है कि दूध उत्पादन में भी बकरियों की अपनी अलग पहचान है। आज भी देश और विदेश में कई ऐसी नस्लें हैं जो उच्च दूध उत्पादन और बेहतर गुणवत्ता के लिए प्रसिद्ध हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, दुनिया भर में बकरियों की आठ प्रमुख नस्लें ऐसी हैं जिन्हें खासतौर पर दूध की अधिक मात्रा और उसमें उच्च वसा प्रतिशत के लिए पाला जाता है।
दूध के लिए मशहूर बकरियों की प्रमुख नस्लें:
सानेन (स्विट्जरलैंड): सानेन बकरियां बड़े आकार, सफेद रंग और शांत स्वभाव के लिए जानी जाती हैं। इनका दूध उत्पादन औसतन 3–4 लीटर प्रतिदिन होता है, जिसमें वसा की मात्रा लगभग 2.5–3 प्रतिशत रहती है।
टोगेनबर्ग (स्विट्जरलैंड): हल्के भूरे रंग और सफेद निशानों वाली यह मध्यम आकार की नस्ल 2–3 लीटर प्रतिदिन दूध देती है। दूध में फैट प्रतिशत 3–4 के बीच होता है।
अल्पाइन (फ्रांस): अल्पाइन नस्ल विभिन्न जलवायु में आसानी से पलने वाली मजबूत नस्ल है। यह औसतन 3–4 लीटर दूध प्रतिदिन देती है, जिसमें वसा 3.5 प्रतिशत तक होती है।
न्युबियन / एंग्लो-न्युबियन (इंग्लैंड): बड़े लंबे कान और आकर्षक कद-काठी वाली यह नस्ल दूध और मांस, दोनों के लिए पाली जाती है। यह 1.5–2.5 लीटर प्रतिदिन दूध देती है, लेकिन दूध में वसा 4–5 प्रतिशत होती है, जो पनीर बनाने के लिए आदर्श है।
लामांच (अमेरिका): छोटे या बिना बाहरी कान वाली इस नस्ल का दूध उत्पादन 2–3 लीटर प्रतिदिन है, और वसा की मात्रा 4 प्रतिशत तक होती है।
ओबरहास्ली (स्विट्जरलैंड): लाल-भूरे रंग और काले धब्बों वाली यह मध्यम आकार की नस्ल 1.5–2.5 लीटर प्रतिदिन दूध देती है, जिसमें वसा 3.5–4 प्रतिशत होती है।
नाइजीरियन ड्वार्फ (पश्चिम अफ्रीका): छोटे आकार और रंग-बिरंगे स्वरूप वाली यह नस्ल 0.5–1 लीटर प्रतिदिन दूध देती है, लेकिन वसा की मात्रा 5–6 प्रतिशत तक होती है, जिससे यह अत्यधिक पोषक मानी जाती है।
बीटल (भारत, पंजाब): बीटल नस्ल भारत और पाकिस्तान में दूध व मांस, दोनों के लिए लोकप्रिय है। यह काले रंग की होती है और औसतन 3.5–4.5 प्रतिशत वसा वाला दूध देती है। सही खुराक मिलने पर उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में सुधार होता है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि सही नस्ल चयन और संतुलित पोषण से बकरी पालन में दूध उत्पादन को बढ़ाकर किसानों की आय में अच्छा इजाफा किया जा सकता है। भविष्य में बढ़ती डेयरी मांग के चलते बकरी के दूध का बाजार भी तेजी से बढ़ने की संभावना है।
