वाराणसी: खरीफ सीजन से पहले धान उत्पादक राज्यों उत्तर प्रदेश, बिहार और ओडिशा के किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। “मिरेकल राइस” के नाम से चर्चित उन्नत धान किस्म मालवीय मनीला सिंचित धान-1 को अब उद्योग लाइसेंस मिल गया है। इस किस्म को हैदराबाद की एक निजी कंपनी को उत्पादन के लिए दिया गया है, जिससे जल्द ही किसानों को इसके बीज उपलब्ध होने की संभावना है।
18 साल के शोध से तैयार खास किस्म
इस धान किस्म को काशी हिंदू विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने करीब 18 वर्षों के लंबे शोध के बाद विकसित किया है। वर्ष 2023 में इसे जारी किया गया था। इस परियोजना का नेतृत्व प्रोफेसर श्रवण कुमार सिंह ने अपनी टीम के साथ किया, जिन्होंने इसे उच्च उत्पादन और बेहतर गुणवत्ता के लिए तैयार किया।
कम समय में अधिक उत्पादन
मालवीय मनीला सिंचित धान-1 की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह केवल 115 से 120 दिनों में तैयार हो जाती है। इसकी उत्पादन क्षमता 55 से 64 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक बताई जा रही है। इसके दाने लंबे और पतले होते हैं तथा टूटन कम होने के कारण बाजार में इसकी गुणवत्ता बेहतर मानी जा रही है।
बेहतर गुणवत्ता और प्रीमियम चावल
इस किस्म में 63.50 प्रतिशत हेड राइस रिकवरी और 26.30 प्रतिशत एमाइलोज सामग्री पाई जाती है, जिससे यह प्रीमियम श्रेणी के चावल में शामिल होती है। इसका स्वाद हल्की मिठास लिए होता है, जिससे बाजार में इसकी मांग अधिक रहने की संभावना है।
रोगों के प्रति मजबूत
यह धान किस्म लीफ ब्लास्ट, ब्राउन स्पॉट और फॉल्स स्मट जैसे प्रमुख रोगों के प्रति मध्यम से उच्च स्तर तक सहनशील है। इससे किसानों की लागत कम होती है और फसल खराब होने का खतरा भी घटता है।
साल में चार फसल का मौका
इस किस्म की एक बड़ी विशेषता यह भी है कि इसे अपनाने पर किसान साल में चार फसल तक ले सकते हैं। जबकि पारंपरिक महीन धान की किस्मों में अधिक समय लगने के कारण आमतौर पर तीन फसल ही संभव होती है।
उन्नत तकनीक से और अधिक लाभ
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसकी खेती उन्नत बुवाई पद्धति के माध्यम से की जाए तो उत्पादन और मुनाफा दोनों में वृद्धि हो सकती है। इस किस्म को कम पानी में भी उगाया जा सकता है, जिससे सिंचाई लागत भी घटती है।
किसानों के लिए बेहतर विकल्प
इस नई मिरेकल राइस किस्म के आने से किसानों की आय बढ़ने की संभावनाएं मजबूत हुई हैं। बेहतर उत्पादन, उच्च गुणवत्ता और बाजार में अच्छी कीमत मिलने के कारण यह किस्म किसानों के लिए एक लाभकारी विकल्प बनकर उभर रही है। खरीफ सीजन से पहले इसके बीज उपलब्ध होने की खबर ने किसानों में नई उम्मीद जगा दी है।
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