खेती-किसानी

उत्तर प्रदेश में मॉनसून की सुस्ती से धान संकट, सरकार ने बाजरे को बताया राहत का विकल्प

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में इस वर्ष मॉनसून की रफ्तार धीमी होने से धान की खेती संकट में है। राज्य के कई जिलों में जुलाई के अंतिम सप्ताह तक भी पर्याप्त बारिश नहीं हुई है, जिससे धान की बुवाई प्रभावित हो रही है। ऐसे में योगी आदित्यनाथ सरकार ने किसानों को राहत देने के लिए बाजरे जैसी कम पानी में उगने वाली फसलों को बढ़ावा देने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। प्रदेश सरकार बाजरा, जिसे अब ‘श्री अन्न’ के नाम से भी जाना जाता है, को वैकल्पिक फसल के रूप में प्रमोट कर रही है। कृषि विभाग द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश में धान, गेहूं और मक्का के बाद लगभग 10 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में बाजरे की खेती होती है। सरकार की रणनीति यह है कि इस बार जिन 29 जिलों में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है, वहां के किसानों को बाजरा उगाने के लिए प्रेरित किया जाए।

कम लागत, कम पानी, अधिक मुनाफा

बाजरा एक ऐसी फसल है जो 400 से 500 मिमी वर्षा वाले क्षेत्रों में भी अच्छी उपज देती है। इसकी खेती अगस्त के मध्य तक की जा सकती है और लगभग 80 से 85 दिन में फसल तैयार हो जाती है। इसका मतलब यह है कि किसान नवंबर से पहले इसकी कटाई कर सकते हैं और समय पर रबी फसलों की बुवाई कर सकते हैं। धान की तुलना में इसकी खेती में कम लागत आती है और बाजार में बाजरे का भाव भी बेहतर मिलता है, जिससे किसानों को अधिक मुनाफा हो सकता है। बाजरे की प्रमुख किस्में जैसे 86M84, BIO-8145, NBH-5929 और धनशक्ति प्रति हेक्टेयर 35-40 क्विंटल तक उत्पादन देने में सक्षम हैं। इन किस्मों की खेती से किसानों को उत्पादन में स्थिरता और लाभकारी मूल्य मिलने की संभावना अधिक होती है।

पोषण और स्वास्थ्य के लिहाज से भी फायदेमंद

बाजरा सिर्फ खेती के नजरिए से ही नहीं, बल्कि पोषण और स्वास्थ्य की दृष्टि से भी बेहद लाभकारी है। इसमें फाइबर, प्रोटीन, विटामिन बी-कॉम्प्लेक्स, कैल्शियम, फास्फोरस और मैग्नीशियम जैसे आवश्यक पोषक तत्व मौजूद होते हैं। बाजरा एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है जो रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है और डायबिटीज, मोटापा, हृदय रोग जैसी समस्याओं में भी फायदेमंद है। साथ ही, यह ग्लूटेन-फ्री होने के कारण एलर्जी या सीलिएक रोग से पीड़ित लोगों के लिए भी सुरक्षित माना जाता है।

सरकारी योजनाएं और समर्थन

उत्तर प्रदेश सरकार बाजरे की हाइब्रिड किस्मों के बीजों पर सब्सिडी दे रही है, जिससे किसानों की लागत घट रही है। इसके अलावा, वर्ष 2022-23 से बाजरे की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर की जा रही है, जिससे किसानों को इसका स्थिर और सुनिश्चित मूल्य मिल रहा है। इससे किसानों में इस फसल के प्रति रुचि और भरोसा दोनों बढ़ा है।

कृषि विभाग की अपील

कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे खरीफ सीजन में अपने क्षेत्र की जलवायु और मिट्टी की उपयुक्तता को ध्यान में रखते हुए बाजरे की खेती अपनाएं और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ उठाएं। विभाग का कहना है कि जलवायु परिवर्तन की चुनौती और अनिश्चित मौसमी हालातों से निपटने में बाजरा एक व्यावहारिक समाधान है, जो किसानों को कम लागत में अधिक लाभ देने के साथ-साथ उनकी आय बढ़ाने में भी मददगार हो सकता है। बाजरा अब सिर्फ एक फसल नहीं, बल्कि जलवायु-संवेदनशील कृषि का भविष्य बनता जा रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार की यह पहल न सिर्फ कृषि को स्थायित्व दे सकती है, बल्कि पोषण और आजीविका दोनों के स्तर पर किसानों को नई दिशा दे सकती है।

Related posts

Leave a Comment