नई दिल्ली: बाजार में आजकल ‘ऑर्गेनिक’ शब्द का इस्तेमाल धड़ल्ले से हो रहा है। खाने-पीने की लगभग हर चीज पर ऑर्गेनिक टैग चस्पा किया जा रहा है, खासतौर पर दूध और उससे बने प्रोडक्ट्स पर। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर ऑर्गेनिक डेयरी प्रोडक्ट्स की भरमार है और हर दूसरा विक्रेता खुद को ऑर्गेनिक बताने में जुटा है। लेकिन विशेषज्ञों की मानें तो ऑर्गेनिक दूध का दावा करना जितना आसान दिखता है, हकीकत में उतना ही पेचीदा और नियमों से भरा हुआ काम है। राष्ट्रीय जैविक एवं प्राकृतिक खेती केंद्र (NCONF) के अनुसार, दूध को ऑर्गेनिक घोषित करने के लिए सख्त प्रक्रियाओं और मानकों से गुजरना होता है। यही नहीं, दूध के ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया किसी फैक्ट्री या ब्रांड के नाम पर नहीं, बल्कि पशु के नाम पर दी जाती है।
दूध के ऑर्गेनिक होने के लिए जरूरी है यह सब
डेयरी एक्सपर्ट डॉ. दिनेश भोंसले बताते हैं कि सिर्फ हरा चारा ऑर्गेनिक हो जाने से दूध ऑर्गेनिक नहीं हो जाता। इसके लिए चारा, पशु, दवाएं और यहां तक कि फीड तक की प्रमाणिकता साबित करनी पड़ती है। ऑर्गेनिक सर्टिफिकेट के लिए यह बातें जरूरी मानी जाती हैं। जैसे : दुधारू पशु को ऑर्गेनिक हरा और सूखा चारा (भूसा) दिया गया हो। जिस खेत में चारा उगाया गया हो, वहां या आसपास की जमीन पर कीटनाशकों (पेस्टीसाइड्स) का इस्तेमाल न हुआ हो, या फिर नियमानुसार पर्याप्त दूरी हो। पशु को दी जाने वाली दवाएं और वैक्सीनेशन भी प्राकृतिक और अनुमत दायरे में होनी चाहिए। बीमारियों की स्थिति में प्राथमिक रूप से हर्बल दवाओं का प्रयोग आवश्यक होता है। पशुओं को दिए जाने वाले फीड की भी जांच होती है कि उसमें कोई रसायन, एडिटिव या कृत्रिम तत्व तो नहीं हैं।
तुरंत नहीं मिलता ऑर्गेनिक टैग
एक आम धारणा है कि अगर किसी पशु को आज से ऑर्गेनिक चारा देना शुरू कर दें, तो वह कल से ऑर्गेनिक दूध देने लगेगा। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह बिल्कुल गलतफहमी है। पशु की ऑर्गेनिक स्थिति को मान्यता देने के लिए एक तय अवधी होती है, जिसमें उसका खान-पान और देखभाल ऑर्गेनिक मानकों के अनुरूप होनी चाहिए। तभी जाकर संबंधित एजेंसी उसकी जांच करती है और सर्टिफिकेट जारी करती है।
क्या कहता है NCONF
NCONF ही देश में दूध को ऑर्गेनिक प्रमाणित करने वाली अधिकृत संस्था है। इसका स्पष्ट कहना है कि जब तक सभी निर्धारित मानकों का पालन न हो, तब तक दूध को ऑर्गेनिक कहना भ्रामक और उपभोक्ता को गुमराह करने वाला हो सकता है। संस्था की तरफ से सर्टिफिकेट पशु के नाम से दिया जाता है, ताकि उसकी निगरानी और ट्रैकिंग हो सके।
उपभोक्ताओं से अपील
विशेषज्ञों की सलाह है कि उपभोक्ताओं को डेयरी प्रोडक्ट खरीदते समय केवल ‘ऑर्गेनिक’ लिखे होने से भ्रमित नहीं होना चाहिए। उन्हें यह भी देखना चाहिए कि क्या उस उत्पाद के साथ किसी मान्यता प्राप्त संस्था द्वारा दिया गया प्रमाणपत्र भी है या नहीं। बाजार में बढ़ते ऑर्गेनिक प्रोडक्ट्स के ट्रेंड के बीच यह जरूरी है कि उपभोक्ता सजग रहें और सर्टिफाइड प्रोडक्ट ही खरीदें। वरना ‘ऑर्गेनिक’ शब्द सिर्फ एक मार्केटिंग टूल बनकर रह जाएगा, जिसकी कोई असली गुणवत्ता नहीं होगी।
