उत्तर प्रदेश का आकांक्षी जनपद चंदौली अब अपनी मेहनत और नवाचार की बदौलत एक नई पहचान बना रहा है। यहां शुरू किया गया काले धान (ब्लैक राइस) का जैविक उत्पादन अब उत्साहवर्धक नतीजे दे रहा है। यही वजह है कि चंदौली देश के 112 आकांक्षी जनपदों की रैंकिंग में छठे स्थान पर पहुंच गया है। यह उपलब्धि जिले के समग्र विकास, किसानों की मेहनत और सामुदायिक सहभागिता का प्रमाण है। चंदौली जिले के काला धान को भारतीय चावल अनुसंधान संस्थान (IIRR) की प्रमाणिकता मिल चुकी है। इस जैविक चावल की गुणवत्ता और औषधीय गुणों की वजह से इसकी मांग अब देश ही नहीं, विदेशों में भी तेजी से बढ़ रही है। इससे जुड़े किसानों की आमदनी में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
किसानों के लिए कम लागत, ज्यादा मुनाफा
काठौरी गांव के प्रगतिशील किसान रामाश्रय कुमार बताते हैं कि अक्टूबर से फरवरी का समय काले धान की खेती के लिए उपयुक्त माना जाता है। यह फसल कम लागत में तैयार होती है, लेकिन बाजार में इसका भाव अन्य चावलों के मुकाबले कहीं अधिक मिलता है। रामाश्रय बताते हैं कि चावल की इस किस्म को उगाने में जमीन की उर्वरता और पर्यावरण संतुलन का विशेष ध्यान रखा जाता है, क्योंकि यह पूरी तरह रसायन-मुक्त जैविक खेती पर आधारित है।
25 से 1000 किसानों तक पहुंचा ब्लैक राइस अभियान
नाबार्ड द्वारा स्पॉन्सर्ड चंदौली ब्लैक राइस फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी के डायरेक्टर शशिकांत राय ने जानकारी दी कि 2018 में महज 25 किसानों के साथ शुरू हुए इस प्रयोग में अब 1000 से अधिक किसान जुड़ चुके हैं। आज चंदौली जिले में करीब 500 हेक्टेयर से ज्यादा भूमि पर ब्लैक राइस की खेती की जा रही है। इसके सकारात्मक परिणामों को देखते हुए अब प्रयागराज, मिर्जापुर, सोनभद्र, बलिया और गाजीपुर जैसे कई जिलों में भी काला धान की खेती शुरू हो चुकी है।
ब्लैक राइस: पोषण और औषधीय गुणों से भरपूर
काला नमक चावल, जिसे लोकप्रिय तौर पर ब्लैक राइस कहा जाता है, सिर्फ स्वाद या रंग का चावल नहीं है, बल्कि यह अपने औषधीय गुणों और पोषण तत्वों के कारण अनमोल माना जाता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स, मल्टीविटामिन, कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम और जिंक शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं। डायबिटीज के मरीजों के लिए यह चावल बेहद लाभकारी है, क्योंकि इसमें शुगर की मात्रा काफी कम होती है।
सरकार की पहल, किसानों के लिए सुनहरा अवसर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने काले धान को वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रॉडक्ट (ODOP) के तहत चंदौली का विशेष उत्पाद घोषित किया है। राज्य सरकार किसानों को इसके उत्पादन से लेकर मार्केटिंग और प्रोसेसिंग तक हर स्तर पर सहायता दे रही है। ट्रेनिंग प्रोग्राम, तकनीकी सहयोग और मार्केट एक्सेस जैसे कदमों के माध्यम से किसानों को वैश्विक गुणवत्ता का उत्पादन करने में मदद मिल रही है।
किसानों की आय दोगुनी करने की ओर बड़ा कदम
काले चावल की बढ़ती मांग और किसानों को मिल रहे लाभ से यह स्पष्ट हो चला है कि यह पहल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस संकल्प की ओर मजबूत कदम है, जिसमें उन्होंने किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य तय किया था। चंदौली में ब्लैक राइस उत्पादन की यह सफलता सिर्फ एक जिले की नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के कृषि क्षेत्र के भविष्य की दिशा में एक मिसाल है। चंदौली जिले की यह सफलता न केवल कृषि नवाचार का उत्कृष्ट उदाहरण है, बल्कि यह दिखाती है कि यदि सरकार, किसान और तकनीक मिलकर काम करें तो ग्रामीण भारत की तस्वीर बदली जा सकती है। अब चंदौली का ब्लैक राइस सिर्फ खेतों की उपज नहीं, गांवों की खुशहाली और किसानों की आत्मनिर्भरता की पहचान बन चुका है।
