खेती-किसानी

करेले की यह किस्म किसानों को दिलाएगी बम्पर मुनाफा

bitter gourd

नई दिल्ली: किसान अब पारंपरिक फसलों के साथ-साथ सब्जियों की खेती कर अपनी आय को तेजी से बढ़ा सकते हैं। जायद सीजन में करेले की खेती एक बेहतर विकल्प बनकर उभर रही है। करेले की मांग पूरे साल बाजार में बनी रहती है और इसके औषधीय गुणों के कारण इसकी कीमत भी अच्छी मिलती है। ऐसे में कम लागत में अधिक मुनाफा देने वाली यह फसल किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रही है।

राष्ट्रीय बीज निगम से मिल रहा बीज

किसानों की सुविधा के लिए राष्ट्रीय बीज निगम द्वारा करेले के बीज ऑनलाइन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। किसान घर बैठे ही बीज मंगाकर खेती शुरू कर सकते हैं। इससे किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज आसानी से मिल रहे हैं और उत्पादन में भी बढ़ोतरी हो रही है।

नट्टू किस्म से अधिक उत्पादन

करेले की नट्टू किस्म एक उन्नत किस्म मानी जाती है, जिसकी खेती उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर की जाती है। इस किस्म की बुवाई फरवरी से जून के बीच की जा सकती है। इसके पौधों की लंबाई करीब 1.20 मीटर तक होती है और प्रत्येक फल का वजन लगभग 155 ग्राम तक होता है। इस किस्म से प्रति एकड़ औसतन 60 क्विंटल तक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है, जिससे किसानों को बेहतर आमदनी होती है।

बीज की कीमत में छूट

करेले के बीज बाजार की तुलना में सस्ती दरों पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। 25 ग्राम बीज का पैकेट लगभग 33 प्रतिशत छूट के साथ 450 रुपये में मिल रहा है। इससे छोटे और सीमांत किसान भी आसानी से इसकी खेती शुरू कर सकते हैं।

गमले में भी उगा सकते हैं करेला

करेले की खेती केवल खेतों तक सीमित नहीं है, इसे घर पर गमलों में भी उगाया जा सकता है। इसके लिए चौड़े और गहरे गमले में उपजाऊ मिट्टी के साथ वर्मी खाद और बालू मिलाकर बीज बोना चाहिए। बीज को 1 से 2 इंच की गहराई में बोकर हल्की सिंचाई करनी चाहिए, जिससे पौधों का विकास सही तरीके से हो सके।

खेती की सही विधि से मिलेगा लाभ

करेले की खेती के लिए जायद सीजन सबसे उपयुक्त माना जाता है। खेत की तैयारी करते समय गोबर की खाद डालकर अच्छी तरह जुताई करनी चाहिए और मिट्टी को भुरभुरी बनाना चाहिए। साथ ही खेत में जलभराव न हो, इसका विशेष ध्यान रखना जरूरी है। नालियां बनाकर दोनों तरफ बीज की बुवाई करना अधिक लाभदायक होता है। किसान जाल बनाकर भी करेले की खेती कर सकते हैं, जिससे बेलों को सहारा मिलता है और उत्पादन बेहतर होता है। सही तकनीक अपनाकर किसान इस फसल से अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।

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