नई दिल्ली: अगर आप घर बैठे दूध-दही, घी या अन्य डेयरी प्रोडक्ट में मिलावट की जांच कराना चाहते हैं तो अब लैब जाने की जरूरत नहीं है। Food Safety and Standards Authority of India (FSSAI) की “फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स” मोबाइल लैब आपके गांव या कस्बे तक पहुंच रही हैं। केंद्रीय पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के मुताबिक देश के 35 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 285 मोबाइल यूनिट्स संचालित हो रही हैं। ये हाईटेक वैन दूध और दुग्ध उत्पादों की मौके पर जांच करती हैं।
क्या है फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स?
ये चलती-फिरती प्रयोगशालाएं (मोबाइल लैब) हैं, जो 24 घंटे विभिन्न इलाकों में घूमती रहती हैं। इनमें मिल्क-ओ-स्क्रीन जैसे आधुनिक उपकरण लगे होते हैं, जिनसे दूध में मिलावट, फैट, एसएनएफ और अन्य मानकों की जांच की जाती है। इस पहल का मकसद ग्रामीण और दूरदराज इलाकों तक खाद्य सुरक्षा सेवाएं पहुंचाना है, ताकि उपभोक्ताओं को शुद्ध उत्पाद मिल सकें और मिलावट पर रोक लगाई जा सके।
फूड प्रोडक्ट की ट्रेसेबिलिटी जरूरी
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत फूड बिजनेस ऑपरेटर (FBO) के लिए नियम बनाए गए हैं। कच्चे माल की खरीद से लेकर तैयार उत्पाद की सप्लाई तक पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड रखना जरूरी है।
ट्रेसेबिलिटी सुनिश्चित करने के लिए:
- सप्लाई चेन का पूरा दस्तावेजीकरण
- निरीक्षण और ऑडिट के दौरान रिकॉर्ड प्रस्तुत करना
- उल्लंघन पर नियामक कार्रवाई का प्रावधान
इससे खाद्य उत्पादों में पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहती है।
कैसे तय होते हैं दूध के मानक?
FSSAI ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक (खाद्य उत्पाद मानक और खाद्य योजक) विनियम, 2011 के तहत दूध और दुग्ध उत्पादों के लिए स्पष्ट मानक तय किए हैं। ये नियम डेयरी सहकारी समितियों समेत सभी FBO पर समान रूप से लागू होते हैं। नए मानक तय करने या पुराने में बदलाव से पहले FSSAI मसौदा अधिसूचना जारी कर आम जनता और हितधारकों से सुझाव मांगता है। प्राप्त फीडबैक की समीक्षा के बाद अंतिम निर्णय लिया जाता है। सरकार का उद्देश्य है कि उपभोक्ताओं को सुरक्षित और मानक अनुरूप खाद्य उत्पाद मिलें और मिलावट पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
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