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खरीफ सीजन में बढ़ी लागत से धान किसान चिंतित

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भोपाल: खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही प्रदेश के धान उत्पादक किसानों ने रोपाई की तैयारियां तेज कर दी हैं। खेतों में धान की पौध तैयार हो रही है और 20 जून के बाद या अच्छी वर्षा होने पर रोपाई का कार्य शुरू होने की संभावना है। हालांकि इस बार किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती खेती की बढ़ती लागत बनकर उभर रही है, जिससे उनकी चिंता बढ़ गई है।

डीजल, खाद और बिजली ने बढ़ाई लागत

किसानों के अनुसार डीजल की कीमतों में पिछले वर्ष की तुलना में 7.74 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हुई है, जिससे खेती का खर्च बढ़ गया है। इसके साथ ही उर्वरकों की सीमित उपलब्धता और बिजली आपूर्ति की अनिश्चितता ने स्थिति को और कठिन बना दिया है। किसानों का कहना है कि यदि वर्षा सामान्य नहीं रही और सिंचाई के लिए डीजल पंपों का अधिक उपयोग करना पड़ा, तो प्रति हेक्टेयर लागत में 1000 से 1500 रुपये तक की अतिरिक्त बढ़ोतरी हो सकती है। वहीं कटाई के समय मशीनों के किराए में संभावित वृद्धि से लागत का दबाव और बढ़ सकता है।

खाद की कमी बनी बड़ी समस्या

नर्मदापुरम जिले के सिंगोड़ी गांव के किसान जयप्रकाश पटेल का कहना है कि इस बार खेती शुरू होने से पहले ही खर्च बढ़ने लगा है। बाजार में डीएपी खाद पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं है, जबकि अन्य उर्वरकों के दाम भी पहले की तुलना में अधिक हैं। उनके अनुसार कुल खेती लागत में 10 से 15 प्रतिशत तक वृद्धि होने की संभावना है। यदि फसल के अच्छे दाम नहीं मिले, तो किसानों का मुनाफा प्रभावित हो सकता है।

उन्नत किस्मों से बेहतर उत्पादन की उम्मीद

किसान उन्नत किस्मों की खेती से बेहतर उत्पादन की उम्मीद कर रहे हैं। एक एकड़ धान की खेती में बीज, खाद, मजदूरी, सिंचाई और कटाई सहित कुल खर्च लगभग 35 हजार रुपये तक आता है, जबकि अच्छी गुणवत्ता की फसल से 70 से 80 हजार रुपये तक की आय हो सकती है। हालांकि बढ़ती लागत के कारण इस बार शुद्ध मुनाफा कम होने की आशंका है।

डीजल पर निर्भरता बढ़ा रही खर्च

धान की खेती में जुताई, मचाई, सिंचाई और परिवहन जैसे कई कार्य डीजल पर निर्भर होते हैं। एक हेक्टेयर में 150 से 200 लीटर तक डीजल की खपत हो सकती है। बिजली की कमी होने पर यह खर्च और बढ़ जाता है, क्योंकि सिंचाई के लिए डीजल पंपों का उपयोग करना पड़ता है।

बिजली आपूर्ति पर टिकी किसानों की उम्मीद

किसानों का कहना है कि यदि समय पर पर्याप्त बिजली उपलब्ध हो जाए, तो डीजल की खपत कम की जा सकती है और लागत को नियंत्रित रखा जा सकता है। लेकिन बिजली कटौती बढ़ने पर लागत में और इजाफा होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर वर्षा, पर्याप्त बिजली और उर्वरकों की उपलब्धता इस सीजन में किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगी। अन्यथा उन्हें बढ़ती लागत और घटते मुनाफे की दोहरी मार झेलनी पड़ सकती है।

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