पशुपालन

बकरी की ये तीन नस्लें बिज़नेस के लिहाज से हैं बेस्ट

These three goat breeds are best for business.

नई दिल्ली, 29 जुलाई 2026: देश में बकरी पालन अब केवल ग्रामीण क्षेत्रों तक सीमित नहीं रह गया है। बदलते समय के साथ शहरों में भी बड़े स्तर पर बकरी पालन को व्यवसाय के रूप में अपनाया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार कम लागत, तेजी से मिलने वाला लाभ और बढ़ती मांग के कारण बकरी पालन किसानों और युवाओं के लिए आय का अच्छा माध्यम बनकर उभर रहा है। केंद्र और राज्य सरकारें भी बकरी पालन को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित कर रही हैं, जिससे इच्छुक लोग वैज्ञानिक तरीके से इस व्यवसाय की शुरुआत कर सकें।

व्यवसाय शुरू करने से पहले तय करें उद्देश्य

विशेषज्ञों का कहना है कि बकरी पालन शुरू करने से पहले यह तय करना जरूरी है कि व्यवसाय दूध उत्पादन के लिए किया जाएगा या मांस उत्पादन के लिए। देश में बकरी के दूध का योगदान कुल दुग्ध उत्पादन का लगभग साढ़े तीन प्रतिशत है, जबकि बकरी के मांस की मांग पूरे वर्ष बनी रहती है। ऐसे में यदि किसान मांस उत्पादन के उद्देश्य से बकरी पालन करना चाहते हैं, तो सही नस्ल का चयन उनकी कमाई बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

गुजरी नस्ल तेजी से बढ़ाती है वजन

गुजरी नस्ल मुख्य रूप से राजस्थान के अलवर क्षेत्र में पाई जाती है। इस नस्ल का बकरा सामान्य रूप से लगभग 69 किलोग्राम और बकरी लगभग 58 किलोग्राम तक वजन प्राप्त कर सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार बेहतर पोषण और वैज्ञानिक प्रबंधन के साथ इस नस्ल के बकरे का वजन 150 किलोग्राम से भी अधिक पहुंच सकता है। यह नस्ल प्रतिदिन औसतन 1.60 किलोग्राम दूध देने की क्षमता रखती है। इसके शरीर का रंग सफेद और भूरा होता है तथा पेट, मुंह और पैरों पर सफेद धब्बे दिखाई देते हैं।

सोजत नस्ल की पूरे वर्ष रहती है मांग

सोजत नस्ल राजस्थान के नागौर, पाली, जैसलमेर और जोधपुर क्षेत्रों में प्रमुख रूप से पाई जाती है। यह बड़े आकार की सफेद रंग की नस्ल है और मुख्य रूप से मांस उत्पादन के लिए पाली जाती है। इस नस्ल का बकरा लगभग 60 किलोग्राम तक वजन प्राप्त कर सकता है। बकरी प्रतिदिन लगभग एक लीटर दूध देती है। उत्तर भारत के साथ-साथ महाराष्ट्र में भी इस नस्ल की बाजार में अच्छी मांग बनी रहती है।

करोली नस्ल का मांस बाजार में लोकप्रिय

करोली नस्ल राजस्थान के कोटा, बूंदी, बारां और सवाई माधोपुर क्षेत्रों में अधिक पाली जाती है। यह नस्ल प्रतिदिन औसतन 1.5 लीटर तक दूध देने की क्षमता रखती है। हालांकि स्थानीय बाजारों में इसकी पहचान मुख्य रूप से मांस के लिए है। इसका शरीर पूरी तरह काले रंग का होता है, जबकि चारों पैरों का निचला हिस्सा भूरे रंग का दिखाई देता है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि इस नस्ल को खुले मैदान और जंगलों में चरने का पर्याप्त अवसर मिले, तो इसका वजन तेजी से बढ़ता है और बेहतर उत्पादन प्राप्त होता है।

सही नस्ल चुनकर बढ़ा सकते हैं मुनाफा

पशुपालन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान बाजार की मांग को ध्यान में रखते हुए उपयुक्त नस्ल का चयन करें और वैज्ञानिक प्रबंधन अपनाएं, तो बकरी पालन से अच्छी आय अर्जित की जा सकती है। सरकार की ओर से उपलब्ध प्रशिक्षण, आधुनिक प्रबंधन तकनीकों और बेहतर पोषण व्यवस्था का लाभ लेकर किसान इस व्यवसाय को सफल और लाभकारी बना सकते हैं।

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